भारतीय संस्कृति और पुरुषवाद कोमा में – Indian culture and Masculinity in Coma

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दोस्तों, और मेरे आदरणीय पाठकों, आज के इस post में एक छोटी सी व्यंग्य रचना हमारे समाज में व्याप्त भारतीय पुरुषवाद पर, उम्मीद है आप इसे भी पसंद करेंगे :

दोस्तों, एक लड़का और एक लड़की की शादी हुई …दोनों बहुत खुश थे! stage पर photo session शुरू हुआ! दूल्हे ने अपने दोस्तों का परिचय साथ खड़ी अपनी साली से करवाया  – ये है मेरी साली ,आधी घरवाली! दोस्त ठहाका मारकर हंस दिए ! दुल्हन मुस्कुराई और अपनी सहेलियों का परिचय अपनी सहेलियों से करवाया – ये हैं मेरे देवर, आधे पतिपरमेश्वर!

ये क्या हुआ….?

अविश्वसनीय…अकल्पनीय ! भाई समान देवर के कान सुन्न हो गए! पति बेहोश होते होते बचा! दूल्हे , दूल्हे के दोस्तों ,रिश्तेदारों सहित सबके चेहरे से मुस्कान गायब हो गयी! लक्ष्मन रेखा नाम का एक गमला अचानक stage से नीचे टपक कर फूट गया! स्त्री की मर्यादा नाम की halogen light भक्क से fuse हो गयी! थोड़ी देर बाद एक ambulance तेज़ी से सड़कों पर भागती जा रही थी! जिसमे दो stretcher थे! एक stretcher पर भारतीय संस्कृति coma में पड़ी थी, शायद उसे attack पड़ गया था! दुसरे stretcher पर पुरुषवाद घायल अवस्था में पड़ा था, उसे किसी ने सर पर गहरी चोट मारी थी! आसमान में अचानक एक तेज़ आवाज़ गूंजी क्यूंकि भारत की सारी स्त्रियाँ एक साथ ठहाका मारकर हंस पड़ी थीं !

साभार : एक regular मित्र

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