मोदी सरकार – आम आदमी की सरकार – Modi Government is for betterment of India

दोस्तों, कांग्रेस सरकार की एक महत्वकांषी योजना थी “आधार कार्ड” . लेकिन मनमोहन सरकार के कार्यकाल के ख़तम होने तक इस योजना का भविष्य खतरे में आ चुका था। सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ मुकद्दमे थे। खुद कांग्रेस सरकार ऐसी कई योजनायें चला रही थी जिसमे जनसँख्या गिनी जा रही थी, उनके सर्वे होने थे, एक दूसरा कार्ड स्वास्थ्य वाले भी बना रहे थे। ऐसे एक कार्ड बनाने और उसके लिए पूरे भारत का सर्वे करने की कास्ट तब 20,000 करोड़ के करीब थी। इसलिए खूब सर्वे हुए।

लेकिन मोदी सरकार ने आने के बाद आधार कार्ड के महत्त्व को समझा और अपनी तमाम सब्सिडी आधार कार्ड के जरिये ट्रांसफर करने की योजना तैयार की। इसके लिए प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत हर भारतीय का खाता खोलने का भी लक्ष्य रखा और काफी हद तक कामयाबी हासिल की। ये अकाउंट भी आधार के जरिये आसानी से खुलता है।

गैस सब्सिडी तो आधार के जरिये मिलती ही है। कुछ महीनो पहले UP में किसानो के ऊपर शुगर मिलों का करोडो रुपया बाकी था, जिसे शुगर मिल चुकाने की हालत में नहीं थी। सरकार ने ये कर्ज चुकाया लेकिन मिलों को ये पैसा नहीं दिया। सीधे किसानो के अकाउंट में 6000 करोड़ की रकम ट्रांसफर की।

अब भारत सरकार बीडी मजदूरों और गैर-कोयला खदान के मजदूरों के लिए कांग्रेस सरकार की ही एक योजना में सुधार ले कर आई है। अब तक कांग्रेस सरकार की एक योजना के तहत बीडी मजदूरों और खदान मजदूरों को उनका घर बनाने के लिए 40,000 रूपये की सब्सिडी मिलती थी।

मोदी सरकार ने इस सब्सिडी को बढाकर डेढ़ लाख रूपये किया है, जिसमे 37,500 मकान बनाना शुरू करने के समय तुरंत मिलेंगे, 90,000 लिंटर डालने के बाद और 22,500 मकान पूरा होने के बाद मिलेंगे।
लेकिन अगर कोई मजदूर मकान बनाने के लिए बैंक से लोन लेना चाहता है तो सरकार ये पूरी रकम डेढ़ लाख एक साथ शुरू में ही दे देगी ताकि इसे मार्जिन मनी मानकर बैंक इसके ऊपर लोन दे सके।

मोदी सरकार की योजना है 2022 तक सभी को मकान देने की। इसी योजना के तहत ये कदम उठाया गया है और ये सब्सिडी ट्रांसफर आधार कार्ड के जरिये होगा ताकि सुनश्चित हो की सही लाभान्शी तक ये रकम पहुंचे और ये आधार कार्ड बायोमेट्रिक होंगे।

लेकिन इस पूरी योजना में यही दिक्कत है। आधार कार्ड बायोमेट्रिक यानी उंगली के निशान के आधार पर बनेंगे। बीडी मजदूर और खदान में काम करते करते मजदूरों की उंगलियाँ इतनी घिस चुकी हैं की उनके उँगलियों के निशान ख़तम हैं और आधार कार्ड के मानको पर खरी नहीं उतरते। सरकार का आदेश है की उनकी आँखों की पुतलियों के आधार पर अब उनका आधार कार्ड बने।

सिर्फ किसान मजदूरों के नाम पर हल्ला मचाने, सम्मलेन करने सरकार को कोसने से भला नहीं होता। सरकार बनाने और उसके बाद गरीब के लिए ऐसे फैसले लेने से गरीब का भला होता है। मोदी सरकार ने इसे फिर सिद्ध किया है।

मोदी सरकार जिंदाबाद , मोदी सरकार आम आदमी, गरीबों की सरकार।


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धन्यवाद,
आपका सादर आभार
Apni Kahaani Team

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