साईं बाबा के अनमोल विचार – Hindi Quotes of Sai Baba

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दोस्तों, बहुत से भक्तो को बाबा ले श्रद्धा-सबूरी का मतलब आज भी स्पष्ट नहीं है। वास्तव में बाबा ने कहा था की अपने ईष्ट, अपने गुरु, अपने मालिक पर श्रद्धा रखो. ये विश्वास रखो की भवसागर को पार अगर कोई करा सकता है तो वो आपका ईष्ट, गुरु, और मालिक है. अपने मालिक की बातों को ध्यान से सुनो और उनका अक्षरक्ष पालन करो. बाबा को पता था की केवल किसी पर विश्वास रखना हो काफी नहीं है. विश्वास की डूबती-उतरती नाव का कोई भरोसा नहीं है इसीलिए बाबा ने इस पर सबूरी का लंगर डाल दिया था. किसी पर विश्वास करना है और इस हद तक करना है की कोई उस विश्वास को डिगा ना सके चाहे कितने ही साल और जनम लगें. जैसा की पहले हमने बताया दुःख दूर होना है और होगा मगर उस समय तक पहुँचने के लिए एक सहारा चाहिए और वो सहारा है श्रद्धा और सबूरी |

साईं बाबा के अनमोल विचार – Sai Baba Quotes :

1. जिस तरह कीड़ा कपड़े को कुतरता है, उसी तरह इर्ष्या मनुष्य को

2. क्रोध मुर्खता से शुरू होता है और पश्च्याताप पर ख़त्म होता है

3. नम्रता से देवता भी मनुष्य के वश में आ जाते है

4. सम्पन्नता मित्रता बढ़ाती है और विपदा उनकी परख करती है

5. एक बार निकले बोल वापस नहीं आते, अतः सोच समझ के बोलें

6. तलवार की चोट इतनी तेज नहीं होती है जितनी की जिव्हा की

7. धीरज के सामने भयंकर संकट भी धूएं के बादल की तरह उड़ जाते है

8. तीन सच्चे मित्र हैं – बूढ़ी पत्नी, पुराना कुत्ता और पास का धन

9. मनुष्य के तीन सद्गुण -आशा, विश्वास और दान

10. घर में मेल होना पृथ्वी पर स्वर्ग होने के समान है

11. मनुष्य की महत्ता उसके कपड़ो से नही वरन उसके आचरण से होती है

12. दूसरों के हित के लिए अपना सुख त्याग करना ही सच्ची सेवा है

13. भूत से प्रेरणा ले कर वर्त्तमान में भविष्य का चिंतन करना चाहिए

14. जब तुम किसी की सेवा करो तो उसकी त्रुटियों को देख कर उससे घृणा नहीं करनी चाहिए

15. मनुष्य के रूप में परमात्मा सदा हमारे सामने होते हैं, उनकी सेवा करो

16. अँधा वो नहीं जिसकी आँखे नहीं है, अँधा वह है जो अपने दोषों को ढकता है

17. चिंता से रूप, बल और ज्ञान का नाश होता है

18. दूसरों को गिराने की कोशिश में तुम स्वयं गिर जाओगे

19. प्रेम मनुष्य को अपनी ओर खींचने वाला चुम्बक है

20. मेरे रहते डर कैसा?

21. मैं डगमगाता या हिलता नहीं हूँ.

22. यदि कोई अपना पूरा समय मुझमें लगाता है और मेरी शरण में आता है तो उसे अपने शरीर या आत्मा के लिए कोई भय नहीं होना चाहिए.

23. मेरा काम आशीर्वाद देना है.

24. मैं किसी पर क्रोधित नहीं होता. क्या माँ अपने बच्चों से नाराज हो सकती है ? क्या समुद्र अपना जल वापस नदियों में भेज सकता है ?

25. पूर्ण रूप से ईश्वर में समर्पित हो जाइये.

26. यदि तुम मुझे अपने विचारों और उद्देश्य की एकमात्र वस्तु रक्खोगे , तो तुम सर्वोच्च लक्ष्य प्राप्त करोगे.

27. अपने गुरु में पूर्ण रूप से विश्वास करें. यही साधना है.

28. हमारा कर्तव्य क्या है? ठीक से व्यवहार करना. ये काफी है.

29. मेरी दृष्टि हमेशा उनपर रहती है जो मुझे प्रेम करते हैं.

30. तुम जो भी करते हो, तुम चाहे जहाँ भी हो, हमेशा इस बात को याद रखो की ईश्वर तुम्हे देख रहा है |

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