दुनिया का सबसे अभिशापित हीरा कोहिनूर – Curse of Kohinoor Diamond

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Curse of Kohinoor Diamond

दोस्तों, पूरी दुनिया में कोहिनूर हीरा सबसे कीमती और प्रसिद्ध माना जाता है जिसकी कीमत अभी भी पूरी तरह से नहीं लगायी जा सकी है लेकिन ऐसा माना जाता है की इसके साथ एक ऐसा अभिशाप जुड़ा हुआ है जिससे आजतक कोई नहीं बच पाया। कहा जाता है की यह हीरा अभिशापित है जिस कारण यह जिस किसी के भी पास जाता है उसे यह पूरी तरह से बर्बाद कर देता है, अनेक लोगो ने, शक्तिशाली राजपरिवारो ने इसे पाना चाहा लेकिन यह जिस किसीके भी पास गया उसे बर्बाद कर गया और कई ऐतिहासिक राजपरिवारो के पतन के साथ भी इस हीरे का नाम जुड़ा है।

बहुत से लोग इसे सम्यन्तक मणि भी कहते है और इसके बारे में कहाँ जाता है की इसे भगवान् सूर्य ने अपने प्रबल भक्त ‘सत्राजित’ की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे वरदान स्वरुप दिया था और यही इसके उत्पत्ति की कहानी मानी जाती है और यही से इसकी अभिशप्त कहानी शुरू होती है। पुराणों के अनुसार यह हीरा एक दिन सत्राजित से खो गया और इसका झूठा आरोप श्रीकृष्ण पर लगा, परन्तु श्रीकृष्ण ने यह हीरा ढूंढ कर वापस सत्राजित को दे दिया और सत्राजित ने श्रीकृष्ण से प्रभावित हो यह उन्हें ही भेंट कर दिया, इसीलिए कहाँ जाता है की श्री कृष्ण पर झूठे आरोप से इस हीरे की अभिशापित कहानी शुरू हुई और बाद में इसी हीरे के कारण यदुवंश का विनाश भी हुआ।

यदुवंश के विनाश के बाद यह हीरा इतिहास में कहीं खो गया और मध्यकाल तक इसका कोई उल्लेख नहीं मिलता लेकिन सन 1306 में एक लेख लिखा गया जिसमे पहली बार इस हीरे का उल्लेख किया गया, इस लेख में मुताबिक जो भी इस हीरे को अपने पास रखेगा उसे बुरी तबाही का सामना करना पड़ेगा, परन्तु तब के शासको ने बात को हँसी में उड़ा दिया लेकिन कोहिनूर ने अपना असर दिखाना जारी रखा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह 14वीं शताब्दी में यह हीरा काकतीय वंश के पास था लेकिन जैसे ही यह हीरा उनके पास पहुंचा उनकी उलटी गिनती शुरू हो गयी और यह वंश और राज्य दोनों ही नष्ट हो गये।

जब तुगलको को इस हीरे के बारे में जाकारी मिली तो वह इसकी चमक देखकर इसे पाने का लोभ न छोड़ सके और उन्होंने यह हीरा काकतीय वंश से छीन लिया लेकिन तुगलक हकीकत न समझ सके और जल्द ही तुगलक वंश का विनाश हुआ और इनका राजपाट मिट्टी में मिल गया।

मुस्लिम आक्रमणकारी बाबर ने भी अपने बाबरनामा में इस हीरे के बारे में जिक्र किया है और इस हीरे के शापित होने के बारे में भी बताया है बहरहाल यह हीरा मुग़ल सल्तनत के पास पहुंचा लेकिन अपनी शक्ति के अहंकार में वह इस हीरे के अभिशप्त होने के बारे में भूल गए और जब शाहजहाँ ने इसे अपने सिंहासन में जड़वाया तो कुछ ही समय बाद मुमताज की मौत हो गयी और खुद शाहजहाँ को भी जेल में डाल दिया गया।

यह हीरा अलग अलग साम्राज्यों के पास जाता रहा और उन्हें बर्बाद करता रहा और इसी कड़ी में यह हीरा मुगलों के पास से पंहुचा क्रूर नादिरशाह के पास जिसे वह अपने साथ अफगानिस्तान ले गया लेकिन क्रूरता से इसकी हया कर दी गयी और इसके बाद यह पहुंचा दुर्रानी शासको के पास और इनके साथ भी वही हुआ तो पहले से अपेक्षित था, अर्थात इनका पूरा शासन परिवार समेत ही नष्ट हो गया।

इतने राजपरिवारो की बर्बादी के बाद भी इस हीरे की यात्रा जारी रही और अपनी अफगान विजय के दौरान यह हीरा महाराजा रणजीत सिंह के पास आया लेकिन अनेक लोगो ने इसके बारे में महाराजा को पहले से ही बता दिया था और इस हीरे की चमक से दूर ही रहने की सलाह दी थी लेकिन इस हीरे को एक नजर देखते ही महाराजा पर ऐसा जादू हुआ की उन्होंने इसे अपने खजाने में शामिल कर लिया और इसके कुछ ही दिनों पश्चात उनकी तेजी से बढती हुई शक्ति अब उतनी ही तेजी से घटने लगी और वह बीमार रहने लगे और आखिर में उनका साम्राज्य नष्ट हो गया और अंग्रेजो ने इनके राज्य को हड़प लिया।

शुरू में तो अंग्रेज भी इस हीरे की चमक में खो गए और इसे इंग्लैंड भेज दिया गया लेकिन आप लोग इस हीरे की शक्ति देखिये की उस समय दुनियाँ का सबसे शक्तिशाली साम्राज्य भी इस हीरे के श्राप से बच न सका और छिन्न भिन्न हो गया, लेकिन अंग्रेज शातिर थे वह इस हीरे की शक्ति समझ गये और इस हीरे के श्राप को नष्ट करने के लिए उन्होंने इसे 2 हिस्सों में काट दिया परन्तु तब तक देर हो चुकी थी और पूरी दुनिया से अंग्रेजी शासन का अंत हो गया और आज तक इंग्लैंड दुनियाँ में अपनी पहचान के लिए जूझ रहा है।

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