सुब्रमण्यम स्वामी की 10 अनजान बातें – 10 Facts about Subramanian Swamy

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Facts about Subramanian Swamy Hindi

दोस्तों, राजनीति के चाणक्य, सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy), 1977 में जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे जो 1990 के बाद जनता पार्टी के अध्यक्ष भी रहे। 11 अगस्त, 2013 को उन्होंने अपनी पार्टी का विलय भारतीय जनता पार्टी में कर दिया। सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) के पिता सीताराम सुब्रमण्यम जाने माने गणितज्ञ थे और सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) भी पिता की तरह ही गणितज्ञ बनना चाहते थे। सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) ने हिंदू कॉलेज से गणित में स्नातक की डिग्री ली और इसके बाद से भारतीय सांख्यिकी इंस्टीच्यूट, कोलकाता पढ़ने गए। आइये पढ़ते है सुब्रमण्यम स्वामी की कुछ अनजान बातें।

सुब्रमण्यम स्वामी की 10 अनजान बातें | 10 Facts about Subramanian Swamy :

1. वाजपेयी सरकार को की थी गिराने की कोशिश – सोनिया गांधी को मुश्किल में डालने वाले सुब्रमण्यम स्वामी ने 1999 में वाजपेयी सरकार को गिराने की कोशिश की थी। इसके लिए सुब्रमण्यम स्वामी ने सोनिया और जयललिता की अशोक होटल में मुलाक़ात भी कराई। हालांकि ये कोशिश नाकाम हो गई। इसके बाद वे हमेशा गांधी परिवार के ख़िलाफ़ ही नज़र आए।
 
2. राजीव गाँधी से थी अच्छी दोस्ती – एक समय में सुब्रमण्यम स्वामी, राजीव गांधी के नजदीकी दोस्तों में भी शामिल थे। बोफोर्स कांड के दौरान वे सदन में ये सार्वजनिक तौर पर ये कह चुके थे कि राजीव गांधी ने कोई पैसा नहीं लिया है। एक इंटरव्यू में सुब्रमण्यम स्वामी का दावा है कि वे राजीव के साथ घंटों समय व्यतीत किया करते थे और उनके बारे में सबकुछ जानते थे।
 
3. आपातकाल के दौरान सरकार नहीं कर सकी थी गिरफ्तार – नानाजी देशमुख ने सुब्रमण्यम स्वामी को जनसंघ की ओर से राज्यसभा में 1974 में भेजा। आपातकाल के 19 महीने के दौर में सरकार सुब्रमण्यम स्वामी को गिरफ़्तार नहीं कर सकी। इस दौरान उन्होंने अमरीका से भारत आकर संसद सत्र में हिस्सा भी ले लिया और वहां से फिर ग़ायब भी हो गए।
 
4. जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में रहे – 1977 में जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में रहे। 1990 के बाद वे जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे। 11 अगस्त, 2013 को उन्होंने अपनी पार्टी का विलय भारतीय जनता पार्टी में कर दिया।
 
5. पिता की तरह स्वामी बनना चाहते थे गणितज्ञ – स्वामी के पिता सीताराम सुब्रमण्यम जाने माने गणितज्ञ थे। पिता की तरह ही स्वामी भी गणितज्ञ बनना चाहते थे। उन्होंने हिंदू कॉलेज से गणित में स्नातक की डिग्री ली l इसके बाद से भारतीय सांख्यिकी इंस्टीच्यूट, कोलकाता पढ़ने गए।
 
6. आर्थिक सुधारो की रखी थी नीव – चंद्रशेखर के प्रधानमंत्रित्व काल में वाणिज्य एवं कानून मंत्री रहते हुए उन्होंने आर्थिक सुधारों की नींव रखी थी। नरसिम्हा राव सरकार के समय विपक्ष में होने के बावजूद स्वामी को कैबिनेट रैंक का दर्जा हासिल था

7. 27 साल में वे हार्वर्ड में गणित पढ़ाने लगे थे – स्वामी ने महज 24 साल में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल कर ली, 27 साल में वे हार्वर्ड में गणित पढ़ाने लगे थे. 1968 में अमृत्य सेन ने स्वामी को दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकॉनामिक्स में पढ़ाने का आमंत्रण दिया। स्वामी दिल्ली आए और 1969 में आईआईटी दिल्ली से जुड़ गए।
 
8. स्वामी की बातो पर इंदिरा को था ऐतराज – उन्होंने आईआईटी के सेमिनारों में ये कहना शुरू किया कि भारत को पंचवर्षीय योजनाएं खत्म करनी चाहिए और विदेशी फंड पर निर्भरता हटानी होगी। इसके बिना भी भारत 10 फ़ीसदी की विकास दर को हासिल कर सकता है। स्वामी तब इतने महत्वपूर्ण हो चुके थे कि उनकी राय पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था यह विचार वास्तविकता से परे है।
 
9. कोलकाता में ज़ाहिर हुआ था स्वामी का विद्रोही गुण –
स्वामी के जीवन का विद्रोही गुण पहली बार कोलकाता में ज़ाहिर हुआ। उस वक्त भारतीय सांख्यिकी इंस्टीच्यूट, कोलकाता के डायरेक्टर पीसी महालानोबिस थे, जो स्वामी के पिता के प्रतिद्वंद्वी थे। लिहाजा उन्होंने स्वामी को ख़राब ग्रेड देना शुरू किया। स्वामी ने 1963 में एक शोध पत्र लिखकर बताया कि महालानोबिस की सांख्यिकी गणना का तरीका मौलिक नहीं है, बल्कि यह पुराने तरीके पर ही आधारित है।
 
10. इंदिरा की नाराज़गी के चलते गवानी पड़ी नौकरी – इंदिरा गांधी की नाराजगी के चलते स्वामी को दिसंबर, 1972 में आईआईटी दिल्ली की नौकरी गंवानी पड़ी। वे इसके ख़िलाफ़ अदालत गए और 1991 में अदालत का फ़ैसला स्वामी के पक्ष में आया। वे एक दिन के लिए आईआईटी गए और इसके बाद अपना इस्तीफ़ा दे दिया।

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