क्या है नेशनल हेराल्ड केस? – What is National Herald Case

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What is National Herald Case
क्या है नेशनल हेराल्ड केस?

 -वर्ष 1938 में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कांग्रेस पार्टी के पैसे से लखनऊ में ‘Associated Journals Limited’ कंपनी बनाई।

-ये कंपनी अंग्रेज़ी में National Herald, हिंदी में नवजीवन, और ऊर्दू में कौमी आवाज़ नाम के अख़बार निकालती थी।

-National Herald के शुरुआती संपादक जवाहरलाल नेहरू थे, और प्रधानमंत्री बनने तक वो Herald Board Of Directors के chairman थे। 

-आज़ादी के बाद ‘Associated Journals Limited’ को देश भर में काफी ज़मीनें मिलीं, सस्ते दर पर loan मिला और इसकी संपत्ति लगातार बढ़ती गई।

-कांग्रेस पार्टी का मुखपत्र बन जाने की वजह से बाद में National Herald का प्रसार बढ़ा नहीं और उस पर गंभीर आर्थिक संकट आ गया।

– हालत इतनी बुरी हो गई कि आखिर में वर्ष 2008 में National Herald का प्रकाशन बंद हो गया।

-उस वक्त ‘Associated Journals Limited’ पर करीब 90 करोड़ रुपये का कर्ज़ था। ‘Associated Journals Limited’ पर कर्ज़ तो था लेकिन देश भर में उसकी संपत्ति करीब 2000 करोड़ रुपये की थी, जिस पर मालिकाना हक के लिए धोखाधड़ी की चालें चली गईं और यही National Herald केस का मुद्दा है। इसके लिए कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगे हैं। ये सब कैसे हुआ ये जानना भी दिलचस्प है।

-ये कहानी 23 नवंबर 2010 से शुरू हुई जब गांधी परिवार के करीबियों ने ‘Young Indian’ नाम की एक कंपनी बनाई।

-जिसमें सोनिया गांधी के 38% और राहुल गाँधी के 38% शेयर थे यानी कुल 76 फीसदी हिस्सा सोनिया और राहुल गांधी का था।

-जबकि बचे हुए 24 फीसदी शेयर राहुल गांधी के करीबी सैम पित्रोदा, गांधी परिवार के करीबी सुमन दुबे, कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी ऑस्कर फर्नांडिज़ और एआईसीसी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा के हैं।

-यानी ‘Young Indian’ कंपनी असलियत में कांग्रेस पार्टी प्राइवेट लिमिटिड थी। इस कंपनी की ‘paid up capital’ सिर्फ 5 लाख रुपये थी।

-इस पूरे मामले में कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं और राहुल गांधी और सोनिया गांधी को इन सवालों के जवाब देने के लिए तैयारी कर लेनी चाहिए।

-पहला सवाल ये है कि कांग्रेस ने ‘Associated Journals Limited’ को 90 करोड़ रुपये का बिना ब्याज़ का कर्ज़ क्यों दिया?

-जबकि नियम ये है कोई भी राजनैतिक पार्टी किसी भी व्यावसायिक काम के लिए कर्ज़ नहीं दे सकती है और इस मामले में तो ब्याज मुक्त कर्ज दिया गया है।

-सवाल ये भी है ‘Associated Journals Limited’ के शेयर सोनिया गांधी और राहुल गांधी की ‘Young Indian’ कंपनी को ट्रांसफर कैसे हुए?

-जबकि ‘Young Indian’ कोई अख़बार या Journal निकालने वाली या Media company नहीं थी।

-सवाल ये भी है कि जब ‘Associated Journals Limited का ट्रांसफर हुआ था तब तक उसके ज़्यादातर shareholders इस दुनिया में नहीं थे, ऐसे में उनके share किसके पास गए और कहां हैं?

National Herald की कई संपत्तियों को किराए पर भी दिया गया है जिससे करोड़ों रुपये कमाए जा रहे हैं। आज अदालत ने अपने फैसले में सुब्रमण्यन स्वामी द्वारा लगाए गए एक आरोप का ज़िक्र भी किया है जिसके मुताबिक दिल्ली में National Herald की बिल्डिंग से हर महीने 60 लाख रुपये का किराया आता है।

सवाल ये है कि National Herald की संपत्तियों का जो व्यावसायिक दोहन हो रहा है वो पैसा किसके खाते में जा रहा है? ये कुछ मुश्किल सवाल हैं जिनसे सोनिया गांधी और राहुल गांधी का सामना हो सकता है। वैसे यहां सोनिया गांधी और राहुल गांधी के लिए सबसे बड़ा सवाल ये है कि उन्हें देश की किसी अदालत में पेश होने को लेकर इतनी बेचैनी या परेशानी क्यों हैं? क्या सोनिया और राहुल गांधी एक आम नागरिक की तरह पटियाला हाऊस कोर्ट में पेश नहीं हो सकते। इन दोनों को देश की न्याय व्यवस्था में भरोसा रखते हुए अदालत में पेश होने के बारे में सोचना चाहिए।

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