अगर एक सेकंड का दिन होता तो क्या होता? – What If A Day Was One Second Long?

Share this:
one second day

दोस्तों, पृथ्वी के चारो तरफ चक्कर लगा रहा  हमारा नेचुरल उपग्रह “चाँद” अपने हर चक्कर में अल्प मात्रा में पृथ्वी का momentum ग्रहण कर लेता है, इस प्रकार पृथ्वी के घूमने की गति धीरे धीरे मंद हो रही है। पृथ्वी द्वारा चाँद को transfer हुए इस momentum के कारण चाँद का पृथ्वी के चारो और परिक्रमा पथ थोड़ा बड़ा हो जाता है।

दूसरे शब्दों में, चाँद हर वर्ष पृथ्वी से लगभग 4 सेंटी मीटर दूर जा रहा है। आज से लगभग 4 अरब वर्षो में चाँद इतना दूर जा चुका होगा कि  हमारी भावी पीढ़ियों को “पूर्ण सूर्य ग्रहण” देखना कभी नसीब नहीं होगा !!!

Earth Is Slowing Down ! और ऐसा सिर्फ चाँद के कारण ही नहीं मानव निर्मित चीजे जैसे bridges, buildings वगेरह भी पृथ्वी का rotation slow करती हैं। इन फैक्ट YOU ALSO 🙂 आप सीधे खड़े रह के भी पृथ्वी की घूर्णन क्षमता पर असर डालते हैं। अगर आप अभी जमीन पर लेट जायेगे तो technically आप अपने शरीर का momentum पृथ्वी के केंद्र के नजदीक ले जा कर पृथ्वी का घूर्णन तेज कर रहे हैं & Making This Day Shorter. बेशक,आपका शरीर का mass पृथ्वी के मुकाबले नगण्य होने के कारण इस effect को calculate करना बहुत मुश्किल है, But Its Not Zero !!!!
 
आपके शरीर का मामूली द्रव्यमान भले ही पृथ्वी के rotation पर ज्यादा प्रभाव ना डाले लेकिन बृहद स्तर पर हुए द्रव्यमान के विस्थापन के कारण परिणाम नाटकीय हो सकते हैं !

GEORGE DAM, CHINA – 2012 से operational.. चीन में बने इस महाविशालकाय बाँध में लगभग 39 ट्रिलियन (39,00,000,0000,000) गैलन पानी समुद्र तल से लगभग 175 मीटर ऊपर विस्थापित हो गया है
जिस कारण पृथ्वी की घूर्णन क्षमता प्रभावित हो जाने से 2012 से पृथ्वी पर हर दिन 0.6 माइक्रो सेकंड लंबा हो गया है !

बहरहाल आपको अभी से अपनी watch सेट करने की जहमत उठाने की जरुरत नहीं, मानवीय क्रिया कलापो के बावजूद कम से कम 15-20 करोड़ वर्ष लगेंगे जब आप एक 25 घंटे के दिन का लुत्फ़ उठा पाये !!!
मेरा सवाल आज ये हैं कि क्या होगा अगर पृथ्वी का rotation इतनी तेज हो जाए कि हर दिन सिर्फ एक सेकंड का होता ? What… If A Day Was One Second Long !!!

Well, ऐसा कभी नहीं होने वाला but Thanks To Computer Simulations जिनकी मदद से हम digitally data feed कर के अविश्वसनीय परिकल्पनाओं को भी virtually अंजाम दे सकते है और ब्रह्माण्ड के बारे में अपनी समझ बेहतर कर सकते है।

पृथ्वी अपनी axis (धुरी) पर घूम रही है और इस rotation से उत्पन्न एक fake force ‘Centrifugal force” के कारण  पृथ्वी की सतह भूमध्य रेखा पर लगभग 42 km का उभार लिए हुए है जो पृथ्वी की shape को “मामूली चपटा” बनाते हैं। बेशक अभी पृथ्वी के rotation की गति इतनी नहीं है कि Centrifugal force, gravity पर विजय प्राप्त कर के पृथ्वी के टुकड़े टुकड़े कर पाये लेकिन अगर एक सेकंड लंबा दिन होता?

यानी पृथ्वी 40075 km की परिधि के चक्र को एक सेकंड में पूर्ण कर लगभग 10% of speed of light की गति से घूम रही होती तो?
 
Phewwwwwww !!!
Catastrophic !!!

अगले ही सेकंड, Centrifugal force (सेंट्रिफ्युगल फ़ोर्स) gravity पर खतरनाक रूप में हावी हो जाएगी और पृथ्वी की shape लगभग गोल से एक तश्तरी माफिक होने लग जायेगी ठीक वैसे ही जैसे किसी ने North Pole और South Pole को पकड़ के पृथ्वी को दबा कर पिचकाना शुरू कर दिया हो !

पृथ्वी की ऊपरी Crust बिल्डिंग के साइज़ के बड़े बड़े टुकड़ो में टूट जाती और पृथ्वी की सतह पर मौजूद किसी भी निर्माण और इंसानो की कब्र अगले ही क्षण बन चुकी होगी। चूँकि पृथ्वी से जुडी हर चीज relatively समान गति से घूम रही होगी तो आपकी मौत के साथ हो रही ये घटनाएं शांतिपूर्ण होगी जब तक कि लगातार फ़ैल रही पृथ्वी रुपी अविलक्षण गति से चक्र की तरह घूमती ये disc किसी से टकरा ना जाए और पहला निशाना होंगे “Man made Satellites”

40 मिली सेकंड के अंदर पृथ्वी से जुड़े और expand करते हुए वातावरण के अणुओ से टकरा कर पृथ्वी के नजदीकी orbit (within 160 km) में चक्कर लगाते सभी satellites, Gamma energy छोड़ते हुए धुल धूसरित हो जायेगे। अगले एक सेकंड में लगातार फैलती Buzz saw रुपी earth-disc 35000 km तक फ़ैल कर ego-stationary orbit में मौजूद satellites को अपना भोजन बना चुकी होगी। अगले 10 सेकंड में ये disc चाँद तक पहुच चुकी होगी। एक घंटे में सूर्य और एक से दो दिन में चक्र रुपी ये disc पूरे सौरमंडल में फ़ैल चुकी होगी। किसी और galaxy में मौजूद कोई प्राणी अगर इस घटना को देख पाता तो उसे ये आभास होता कि एक छोटे से बिंदु से शुरू हुआ एक घूमता हुआ चक्र बड़ा होते होते पूरे सौरमंडल में छा गया है।

लगातार बड़ी होती ये disc अपने रास्ते में पड़ने वाले धूमकेतुओं, उल्कापिंडों से टकरा कर अद्धुत रूप में विनाशकारी Gamma Ray burst उत्पन्न करेगी जो इस पूरे सौरमंडल में मौजूद किसी भी ग्रह पर मौजूद जीवन का अंत कर देगी।

चूँकि पृथ्वी का axis थोड़ा tilted (झुका हुआ) है और चंद्रमा, सूर्य, और बाकी ग्रहो के orbit की कक्षा पृथ्वी के equator के parallel नहीं है तो कहा जा सकता है कि लगातार फ़ैल रही disc रुपी पृथ्वी दूसरे planets को directly hit नहीं करती but however, चाँद हर दो हफ्ते में एक बार पृथ्वी के चक्कर लगाते हुए पृथ्वी की भुमध्य रेखा के parallel आता है। अगर argument के लिये माना जाए कि disc रुपी पृथ्वी उसी वक़्त फैलना शुरू करती और चाँद को अगर directly hit करती तो?

Well, 10% of speed of light से घूमती पृथ्वी और चाँद की ये टक्कर इतनी विध्वंसकारी होती कि इस टक्कर से चाँद असंख्य टुकड़ो में बंट कर अपनी कक्षा छोड़ ब्रह्माण्ड की गहराइयो में एक अनजान सफ़र पर निकल गया होता।

इस टक्कर के परिणाम स्वरुप इस विशाल मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती कि अगर आप सूर्य की सतह पर बैठ कर इस टक्कर को देखते तो आपके सर के ऊपर मौजूद आसमान में हुआ ये विस्फोट आपके पाँव के नीचे मौजूद सतह के मुकाबले भी कई गुणा चमकदार होता।

Yes, I Am Serious, This Impact Would Generate Enormous Amount Of Energy So that…

Sky Above You Would Be Brighter, Than Surface Below Your Feet !

साभार – फेसबुक लेखक श्री विजय सिंह ठकुराय

Share this:

Leave a Reply