नेट न्यूट्रालिटी और फेसबुक फ्री बेसिक्स – Net Neutrality & Facebook Free Basics

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Net Neutrality & Facebook Free Basics

दोस्तों, Facebook और Google से पहले Microsoft सबसे बड़ी कंपनी मानी जाती थी। Operating System मे Windows का market share सबसे ज्यादा हुआ करता था और अपनी इस पोजीशन का Microsoft ने बहुत फायदा उठाया। बेहिसाब पैसा था उसके पास। उसने अपने मुक़ाबले किसी और commercial operating system को सामने नहीं आने दिया। सिर्फ Linux ऐसा operating system है जो उसके मुक़ाबले है और free है। Apple का शेयर भी operating system में काफी कम है।

Microsoft ने अपने Web Browser, Internet Explorer को जबर्दस्ती हर PC मे डाला और competitor web browser को ख़त्म करने की हर संभव कोशिश की। Music के लिए Windows music player को launch किया और free media players को भी market से हटाने की पूरी कोशिश की।

USA और Europe दोनों जगह Microsoft पर सरकारों ने मुकदमे किए, उसकी unfair trade practice पर रोक लगाई गयी और भारी जुर्माने किए गए।

क्या भारत मे हम Facebook पर ऐसे किसी मुकदमे की सोच भी सकते हैं? Facebook भारत मे registered company नहीं है। वो न कोई tax देती है उस मुनाफे पर, जो उसे भारत मे किए गए विज्ञापन से होता है, न ही उस पर कोई भी मुकदमा किया जा सकता है।

पिछले कुछ दिनों मे Facebook ने अपने Free Basics platform  के प्रचार के लिए करीब 100 करोड़ रुपए विज्ञापनो पर खर्च किए हैं। आखिर वो इतनी मेहनत और पैसा क्यों फूँक रहा है? Facebook एक public limited company है, उसके इस दान पुण्य पर, free internet पर, विज्ञापनो पर उसके share holders नाराज क्यों नहीं हैं? उसके शेयर के भाव गिर क्यों नहीं रहे?

आखिर Facebook को फायदा कैसे होगा? इसी जवाब मे Free Basics के समर्थन और विरोध की गुत्थी छुपी है।
Facebook और Google को असली कमाई विज्ञापन से होती है। लेकिन विज्ञापन से कमाई तो newspapers को भी होती है, tv channels को भी होती है। फिर Facebook और Google कैसे अलग हैं?
दोस्तों, Facebook और Google दोनों आपकी हर हरकत को monitor करते हैं। हम हमेशा Facebook या Google chrome पर अपने आपको login रखते हैं ताकि बार बार अपना username और password टाइप करने के झंझट से बचे रह सकें और हम जो भी website visit करते हैं, विज्ञापन देखते हैं, article पढ़ते हैं, कुछ भी करते हैं, वो record होता है, हमारा data profile बनता है और ये सब लगातार update होता है। हमारी रुचि , हमारी जरूरत सब record होता है।

मान लीजिये, कल को कोई company अपने hotel के प्रचार के लिए Facebook के पास पहुंचेगी तो Facebook के पास उस hotel के लिए accurate data होगा की किन किन लोगों को उसका विज्ञापन दिखाना है और इसी डाटा की कीमत है

Cloud Computing के बाद जो अगला बड़ा नाम आ रहा है वो है Big Data Analysis, करोड़ो लोगों के data को analysis करके जरूरी information निकालना।

Delhi Chief minister, Arvind Kejriwal साहब ने Delhi मे free Wi-Fi देने का वादा किया था। Google और Microsoft करीब 500 railway stations पर free Wi-Fi देने वाले हैं। Airports पर Wi-Fi free है। ट्रेनों मे भी free internet देने का इंतजाम हो रहा है।
Facebook फिर ऐसा कौन सा अनोखा काम करने वाला है जिसके लिए उसे करोड़ो रुपए दान पुण्य करने होंगे। इसी देश मे करोड़ो लोगों तक पहले Mobile और अब Smartphones पहुंचा। किसी ने नहीं कहा की free call की सुविधा दो। फिर internet free करने की मांग क्यों?

क्योंकि जिसकी मुट्ठी मे इंटरनेट उसी के हाथों मे वर्ल्ड एकोनोमी होगी। फ्री बेसिक्स से करोड़ो लोग इंटरनेट से नहीं फेस बुक से जुड़ेंगे। उनका सभी डाटा फेसबुक के पास होगा। कुछ करोड़ खर्च करके, रिलायंस को देकर, फेसबुक उसी डाटा से कंपनियों के विज्ञापन से अरबों कमा रहा होगा। और यही एकमात्र प्रॉफ़िट नहीं है।

अभी हम internet पर Flipkart, Snapdeal, Uber, Ola, बड़ी और छोटी हजारो कंपनी देखते हैं और ये कंपनी Mobile Apps के जरिये हमारे फोन मे भी हैं। हजारो ऐसी apps और बन रही हैं। Free Basics मे वही apps होंगी जो Facebook के हिसाब से बनी होंगी।

Internet पर competition की वजह से ये App कीमत कम करती हैं। और जहां competition न हो?

तो Facebook ने तो अपने profit का जुगाड़ कर लिया है। USA और Europe ने Facebook को अपने यहाँ free internet का झांसा देने नहीं दिया। बल्कि ऐसी कंपनियों के ऊपर जुर्माना लगाया जो competition को खत्म करती थीं। हमारे देश मे ऐसा नहीं होता। यहाँ खुद ही सावधान रहना होता है।

क्या आप सावधान हैं, थे?

मुझे जवाब मालूम है। नहीं हैं, न थे। कुछ साल पहले तमाम News papers और TV news channels बड़े Industrialists ने खरीद लिए। सभी शांत रहे किसी को क्या फर्क पड़ता है। किसी का क्या गया?

अब सभी TV channel और News papers को गाली देते हैं। कोसते हैं, बिकाऊ, भांड, presstitute कहते हैं।

तैयार रहिए Internet को भी ऐसे ही नामो से पुकारने के लिए। एक बड़ी कंपनी पर भरोसा करके Internet उसके हवाले करने को तैयार हैं।

जिनके लिए अपनी स्वतन्त्रता की कीमत नहीं वो गुलाम ही रहते हैं। यूं ही नहीं अंग्रेज़ो ने 200 साल शासन किया हम पर।

फ्री बेसिक्स ज़िदाबाद कहिए।

साभार – श्री शरद श्रीवास्तव जी

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