हम गुलाम क्यों और कैसे बने – How We Became Slave

Share this:
How We Became Slave

दोस्तों, बाबर और राणा सांगा में भयानक युद्ध चल रहा था। उन दिनों युद्ध केवल दिन में लड़ा जाता था, शाम के समय दोनों तरफ के सैनिक अपने अपने शिविर में आराम करते थे। फिर सुबह युद्ध होता था। लड़ते लड़ते शाम हो चली थी, दोनों तरफ के सैनिक अपने अपने शिविर में भोजन कर रहे थे।

बाबर टहलते हुऐ अपने शिविर के बाहर खड़ा दुश्मन सेना के कैम्प को देख रहा था तभी उसे राणा सांगा की सेना के शिविर से कई जगह से धुंआ उठता दिखाई दिया। बाबर को लगा कि दुश्मन के शिविर में आग लग गई है, उसने तुरंत अपने सेनापति मीर बांकी को बुलाया और पूछा कि देखो दुश्मन के शिविर में आग लग गई है। शिवीर में पचासों जगहों से धुंआ निकल रहा हैं।
सेनापति ने अपने गुप्तचरों को आदेश दिया, जाओ पता लगाओं कि दुश्मन के सैन्य शिविर से इतनी बड़ी संख्या में इतनी जगहों से धूंओ का गुब्बार क्यों निकल रहा है?

गुप्तचर कुछ देर बाद लौटे उन्होंने बताया कि हुजूुर दुश्मन सैनिक हैं वे एक साथ एक जगह बैठकर खाना नहीं खाते। सेना में कई जातियों के सैनिक है जो एक दूसरे का छुआ तक नहीं खाते। इसलिए वे सब अपना अपना भोजन अलग अलग बनाते हैं और अलग अलग ही खाते हैं। एक दुसरे का छुवा पानी तक भी नहीं पीते।

यह सुन कर बाबर खूब जोर से ठहाका लगा कर हंसा। काफी देर हंसने के बाद उसने अपने सेनापति से कहा कि मीर बांकी फ़तेह हमारी ही होगी। वे हमसे क्या लड़ेंगे जिनकी सेना एक साथ मिल बैठ कर खाना तक नहीं खा सकती। वे एक साथ मिल कर दुश्मन के खिलाफ कैसे लड़ेगी?

बाबर सही था और केवल तीन ही दिनों में राणा सांगा की सेना मार दी गई और बाबर ने मुग़ल शासन की नीँव भारत में गाड़ दी।

दोस्तों उस वक़्त में और आज में कोई जयादा फर्क नही है। हम तब भी वैसे ही थे जैसे आज है। भारत देश चाहे मंगल तक पहुंच गया है पर हमारी सोच में जयादा फर्क नही आया है। हम आज भी जाति और धर्म के नाम पर बंटे हुए है जिसका फायदा दुशमन देश उठा रहा है। उन्हें पता है भारत के लोग जाति और धर्म के नाम पर एक दूसरे से बंटे हुए है और उन्हे भड़काने के लिए एक चिंगारी भर की जरूरत है और बाकि का काम खुद बखुद हो जाएगा।

Share this:

Leave a Reply