गॉडजिला की कहानी – Godzilla Story in Hindi

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Hindi Story of Godzilla

दोस्तों, Godzilla सिर्फ महाकाय दानवो का बादशाह ही नहीं, बल्कि box office का भी बादशाह कहा जा सकता है।

Dinosaur

विषय पे बनी फिल्में अक्सर बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई करती है, science की पुस्तको के अनुसार पृथ्वी पे हुए सबसे दानवाकार 

Dinosaur का वजन लगभग 80 टन तथा सबसे ऊँचे 

Dinosaur की ऊंचाई लगभग 60 फुट तक होती थी।

लेकिन, फ़िल्म में दिखाया गया समुद्र में छिपता और मानवो से लोहा लेता हुआ 385 फुट ऊंचा, 90000 टन भारी महादानव असली जिंदगी में होना संभव है क्या? Well, Biologically NO !

अभी तक पृथ्वी पे पाया गया सबसे भारी जीवित प्राणी blue whale का वजन लगभग 209 टन होता है, एक 90000 टन के दानव को जीने के लिए प्रतिदिन कम से कम 21,50,000,00 कैलोरी की जरुरत पड़ती, Think It This Way.

अगर उस Godzilla को सिर्फ मानव खुराक पर ज़िंदा रहना होता तो चूँकि एक मानव शरीर में लगभग 11,00,00 कैलोरी होती है तो Godzilla को daily survival के लिए लगभग 1950 मनुष्यो को मार के खाना पड़ता, Kind Of Tough Job 🙂

समुद्र से बाहर निकल कर हम पे झपटते Godzilla को मारने के लिए शायद हमें tanks, missiles, nuclear bombs की जरुरत नहीं पड़ती, एक चीज ऐसी है जो Godzilla का काम स्वयं तमाम कर देती – – GRAVITY !
 
इतने भीमकाय शरीर को support करने के लिए Godzilla की हड्डिया पृथ्वी के gravity के कारण अपना वजन ना संभाल पाने से pressure के कारण ध्वस्त हो गई होती और अभी तक उपलब्ध किसी भी जीवाश्म के आधार पर कहा जा सकता है कि Godzilla का दिल इतने विशालकाय शरीर में पृथ्वी की gravity से लड़ कर blood pump नहीं कर पाता तो देखा जाए तो Godzilla जैसी चीजे होना पृथ्वी पर संभव नहीं है, They Are Just Fictional Characters !!! But However, 

Dinosaur वास्तविक है, आज से करोडो वर्षो पूर्व इसी पृथ्वी पर वे विचरण किया करते थे।  In Fact, आज भी करते हैं। Yes, 

Dinosaur आज भी मौजूद है आपके आस पास जो पक्षी अर्थात Birds आप देखते हैं वे actual में 

Dinosaur वंश के ही प्राणी है जो करोडो वर्ष पूर्व हुए 

Dinosaurs के अंत की गाथा के एकमात्र विजेता कहे जा सकते हैं।

तो क्या हम किसी भी प्रकार से 

Dinosaurs को आज 21वी सदी में वापस ला सकते हैं? एक Jurassic Park की तरह जहाँ 

Dinosaur की विलुप्त हुई प्रजातियों को रख बच्चों को उन्हें दिखा के कमाई की जा सके? Yeah! We Can लेकिन problem ये है कि retro genetic engineering से बनाई वे चीजे historical 

Dinosaur नहीं होगी।  They Will Be Things We Made !

बहरहाल, इस पोस्ट को लिखते हुए मेरे दिमाग में एक सवाल अक्सर आता है कि हमें, बच्चों को, इंसानो को 

Dinosaur की फिल्में इतनी पसंद क्यों आती है?

क्यों हम एक विशाल दानव को New York की सड़को पर तोड़फोड़ मचाते हुए देखने के लिए पैसा खर्च कर first day, first show देखने की कोशिश करते हैं?

शायद इसका जवाब ये हैं कि Dracula, भूत प्रेत, Aliens, वगेरह वगेरह थोड़े थोड़े अवास्तविक प्रतीत होते है लेकिन, 

Dinosaur? हमारे पास पक्के सबूत है कि कभी किसी वक़्त पृथ्वी के जिस हिस्से में हम रहते हैं वहा मौत बन के घूमते 

Dinosaur का राज होता था।

मौत….मौत जिसके आगे अपनी बेहतरीन knowledge, ज्ञान विज्ञान, क्षमताओ के बावजूद इंसान को हमेशा समर्पण करना पड़ा है लेकिन मौत के आगे आगे भागना, मौत के पंजे से आँख मिचौली कर बच निकलने की कोशिश करना भी इंसानो का पसंदीदा शगल रहा है।

Watching Something Flip Out And Start Killing Us Is Fun Morbid Curiosity! But, The Most Amazing Part Is To See The Flip Undone. Watching Humans Emerging As Death-Defeater !

किसी महाकाय दानव को छलांग मार कर इंसानो की मृत्यु के रूप में इंसानो के पीछे भागते हुए देखना एक जिज्ञासा है,अवचेतन में छुपा हुआ भय जो स्वयं को एक दिन मृत्यु से सामना करने के लिए तैयार कराना चाहता है लेकिन, ऐसी फिल्मो में मृत्यु से डर कर भागते मनुष्यो के बीच किसी नायक का उभार और मृत्यु की पराजय होते हुए देखना ही सबसे सुखद एहसास है !

बेशक Dinosaur हम इंसानो की तुलना में विशाल मजबूत और शक्तिशाली हो सकते है लेकिन इससे ये तथ्य नहीं बदलता कि 

Dinosaur सिर्फ एक इतिहास है।

आज से 6.5 करोड़ वर्ष पूर्व उन्होंने एक ऐसी सुबह का साक्षात्कार किया था जब आसमान से लगभग 10 किलोमीटर चौड़ी एक चट्टान रूपी मौत आहिस्ता से उनकी तरफ बढ़ी और अगले ही पल पृथ्वी पर अरबो nuclear bombs एक साथ विस्फोट कर दिए जाने से आई तबाही का नजारा था। चट्टान के टकराने से हुए विस्फोट से उत्पन्न प्रचंड shock waves के कारण विश्वव्यापी भूकंप और समुद्र में सेकड़ो मीटर ऊँची सुनामी आ गई थी। ज्वालामुखियों ने अपने मुहाने खोल कर पिघले हुए लावा की बारिश शुरू कर दी थी, वातावरण में व्याप्त कई किलोमीटर गाढ़ी धूल ने सूर्य की जीवनदायिनी किरणों का पृथ्वी से संपर्क वर्षो के लिए तोड़ दिया था जिस कारण पृथ्वी Ice Age में चली गई थी और तत्काल विश्व में मौजूद 75% प्रजातिया इतिहास बन गई !

This Extinction Could Be A Reminder, That Sooner Or Later Nature Will Beat Everyone !

पृथ्वी पर ज्ञात 100 से अधिक विशालकाय crater (उल्कापिंडों से बने गड्ढे) इस बात का सबूत है कि समय समय पर जिंदगी को प्रकृति के क्रूर पंजो ने काल का ग्रास बनाया है, इस वक़्त पृथ्वी के आस पास घूमते हुए 320000 से अधिक ऐसे एस्टेरोइड ज्ञात है जो पृथ्वी पर जलजला लाने के लिए पर्याप्त है।
Regardless To Say जिनमे से 2100 से अधिक इतने विशालकाय है जिनमे से एक की भी हमारे खूबसूरत ग्रह से टक्कर इस ग्रह से जीवन का पूर्ण सफाया कर के पृथ्वी को शमशान में तब्दील कर सकती है। शायद नियति द्वारा निर्धारित किये गए ऐसे ही किसी भविष्य का सामना करते हुए हम इंसानो को भी कभी ना कभी जीवन का समर्पण करने पड़े लेकिन As A Human We Might Stand A Fighting Chance इंसानो के पास तकनीक, दिमाग और हार ना मानने का जज्बा मौजूद है जो हमें डायनासोर से अलग बनाता है।

ब्रह्माण्ड की गहराइयो में झांकना, अपने टेलिस्कोप की सहायता से आसमान में चमकती इन रोशनियों को निहारना, अरबो डॉलर खर्च कर भेजे गए पृथ्वी की बाहरी कक्षा में मौजूद चक्कर लगाते सैटेलाइट्स शायद कभी कभी गैर जरुरी लगते हैं। लेकिन शायद ये गैर जरुरी काम ही एक दिन आने वाले खतरे को भांप के मानव जाति को डायनासोर की तरह इतिहास बनने से बचाएं !

May Be Dinosaurs Went Extinct Because They Didn’t Have A Space Program !

साभार – फेसबुक लेखक श्री विजय सिंह ठकुराय

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