क्या आप अपने दिमाग का सिर्फ 10% हिस्सा इस्तेमाल करते हैं – Do You Use 10% Of Your Brain?

Share this:
10% brain myth

दोस्तों, हम अपने दिमाग का सिर्फ 10% हिस्सा इस्तेमाल करते हैं, अगर किसी तरह हम 100% दिमाग इस्तेमाल कर सकते तो शायद हम universe की fundamental forces को control कर सकते थे, mental power से अणुओ को जोड़ किसी भी आकृति का निर्माण कर सकते थे और तो और समय की चाल को भी अपनी इच्छानुसार रोक सकते थे।

सुनने में बड़ा मजेदार लगा न? पर देखा जाए तो वास्तव में ये statement बकवास है।

उठ कर चलना शुरू कर देना या बैठ कर कुछ शब्द कहने में भी आपके दिमाग का 35% से ज्यादा हिस्सा इस्तेमाल होता है। वास्तव में आपका दिमाग अलग अलग parts में विभाजित है, ये parts जैसे visual parts, motor system, self awareness system आदि आपके शरीर की अलग अलग क्रियाओ को control करते हैं। इस प्रकार अलग अलग समय में दिमाग के अलग अलग हिस्से activate होते हैं, In fact, brain mapping जैसी मशीनों में brain में चल रही electrical activities को देखा जा सकता है and Its Safe To Say That आप अपने brain को 100% इस्तेमाल करते हैं। 10% myth को सपोर्ट करने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

देखा जाए तो शायद पश्चिमी साहित्यकार William James ने 1908 में अपनी पुस्तक “The Energies Of Man” में कहा था कि “मानव अपने दिमाग की क्षमताओ का सिर्फ 10% हिस्सा इस्तेमाल कर पाता है”
वास्तव में उनकी बात का निहितार्थ शायद “Mental Capabilities” से था जिसे तोड़ मरोड़ के science fiction लेखको ने अपनी fantasy पूर्ण कहानियो में रोमांच भरने के लिए इस्तेमाल किया और वर्तमान में Lucy जैसी फिल्में भी इस भ्रम को बढ़ावा दे रही है।

बहरहाल, पर हमें Lucy जैसी फिल्म पसंद क्यों आती है? शायद इसलिए क्योंकि हम इंसान अंदर से इस universe की विराटता के सामने खुद को बहुत संकीर्ण महसूस करते है अपने दिमाग की अनंत क्षमताओ का ख्याल इंसानो को आदिकाल से ही रोमांचित करता रहा है और उसको ये लगता है कि विज्ञान एक सीमा तक ही universe के रहस्यों को समझ सकता है। लेकिन दिमाग की कोई सीमा नहीं “सिर्फ आंतरिक मेधा के आधार पर ही परम सत्य का साक्षात्कार किया जा सकता है”

दिमाग की अनंत सीमाओ का ये विचार सुनने में रोचक प्रतीत होता है लेकिन Trust Me आपके दिमाग को मूर्ख बनाना  दुनिया का सबसे आसान काम है।

एक काम कीजिये – आँखे बंद कर लीजिये और अपनी जीभ बाहर निकाल लीजिये और पूर्ण तल्लीनता के साथ imagine कीजिये कि आपने एक नींबू काटा और उसका रस अपनी जीभ पर निचोड़ दिया उसके बाद दुसरा नीबू काटा और उसका रस भी जीभ पर निचोड़ दिया इस तरह एक के बाद एक 10 नींबू आपने अपनी जीभ पर निचोड़ दिए जाइए और ये प्रक्रिया पूर्ण एकाग्रता के साथ एक मिनट तक कर के आइये।

Done? Why Your Mouth Is Watering Now 🙂

सिर्फ नींबू को जीभ पर निचोड़ने का ख्याल ही आपके मुह में पानी ला सकता है तो क्या guarantee है कि ध्यान के दौरान जो अनुभव आपको प्राप्त हुए है वे आपकी आशाओ और शिक्षाओ के अनुरूप आपके अवचेतन मन द्वारा निर्मित मायाजाल नहीं था? You Think Gautam Buddha Was Enlightened? Who To Say It Wasn’t Hallucination?

आपका दिमाग सिर्फ आपको भ्रमित करने के लिए design किया गया है और आपका दिमाग आपको आपकी आशाओ और विश्वास के अनुरूप ही चलचित्र दिखाता है। ये विश्वास ही है कि आदमी को दवाई बता के, चूरन खिला के स्वस्थ किया जा सकता है। ये दिमाग ही है जो आपको आसमान में छाई धुन्ध में भी मनचाहे चेहरे दिखा सकता है और पत्थर की मूरत में भी भगवान कृष्ण को दिखा सकता है।

देखा जाए तो ब्रह्माण्ड का कण कण आपकी आशाओ और इच्छाओ के अनुरूप वास्तविकता को प्रभावित कर सकता है।  इसे कहते हैं – “PlaceBoo Effect”

शायद आप कहेंगे कि ध्यान के दौरान स्वयं को भूल कर परम आनंद की अनुभूति एक अलौकिक अनुभव है?
Oh Really? May be You Never Had A Orgasm ! सेक्स के दौरान चरम सीमा पर पहुचने पर हुए orgasm में इंसानी दिमाग के Self Awareness, Fear, Anxiety आदि system shut down हो जाते हैं और उस वक़्त दिमाग इंसान को परम आनंद की अनुभूति कराता है। वास्तव में विचारो के संघर्ष से मुक्ति ही परम आनंद है। इसका अलौकिकता से कोई सम्बन्ध नहीं और आपको अपने अनुभव अलौकिक लग भी रहे हैं तो Doesn’t Matter How Pleasurable, Fascinating That Experience Sounds, It Doesn’t Change The Fact That It Happened In Your Mind And Your Are All Alone In Your Mind !

आपके दिमाग में कोई घुस कर नहीं देख सकता कि जो आपको महसूस हो रहा है वो “Enlightenment” है
या आपकी आशाओ के आधार पर आपके अवचेतन दिमाग द्वारा आपको दिखाया जा रहा चल चित्र,
तो ब्रह्माण्ड की महाशक्तिशाली माया की मरीचिका से निकल कर ब्रह्माण्ड के रहस्यों को समझने का कोई विश्वसनीय तरीका नहीं?

Well, देखा जाए तो एक तरीका है।

अगर A=D, B=E तो C=?
 
जाहिर सी बात है कि आप कहेगे कि C=F होगा, Why Are You So Sure? क्योंकि इस कथन में एक pattern है और एक mathematical pattern अपरिवर्तनीय होता है। एक बार जो program जिस pattern से शुरू हुआ है उस pattern अथवा गणितीय नियमितताओ का पालन करना program का गुण धर्म है। एक बार प्रोग्राम activate होने के बाद स्वयं programmer भी program में फेर बदल नहीं कर सकता।

इस अद्धुत ब्रह्माण्ड पर नजर दौड़ाने पर जो चीज मानव मन को सबसे ज्यादा विस्मित करती है वो है इस ब्रह्माण्ड की गणितीय नियमितता ! ब्रह्मांड का कण कण, vibration कर रही ऊर्जा की तरंगे हैं जो गणित की भाषा बोलती है। शायद ब्रह्माण्ड का ये सबसे महान आश्चर्य है कि स्थूल पदार्थ के अणुओ में सूक्ष्म दर सूक्ष्म झाँकने पर अंत में पदार्थ बचता ही नहीं, रह जाते हैं तो Mathematical Quantum Codes !

इस ब्रह्माण्ड के रहस्यों को समझने के लिए जरुरत है एक “Theory Of Everything” की एक ऐसी समीकरण जो gravity और quantum physics को एकीकृत कर इस ब्रह्माण्ड की सम्पूर्ण व्याख्या को एक दो लाइन की गणितीय समीकरण में सीमित कर देगी  और हमें “भगवान् का दिमाग” पढ़ने का सामर्थ्य प्रदान करेगी।

ईश्वर का दिमाग और कुछ नहीं ब्रह्माण्ड में ऊर्जा की तरंगो का सतत नृत्य मात्र है और अगर आपको ईश्वर का दिमाग पढ़ना है तो Instead For Sitting Next Time To Achieve Enlightenment, LEARN MATHEMATICS !

नोट: जिन लोगो को लगता है कि गणित या विज्ञान ब्रह्माण्ड की परम चेतना की व्याख्या नहीं कर सकता उनसे सिर्फ इतना अनुरोध है कि ग़लतफ़हमी संभाल के रखिये, जल्द दूर हो जायेगी 🙂

साभार – फेसबुक लेखक श्री विजय सिंह ठकुराय

Share this:

One Response

  1. May 2, 2017

Leave a Reply