असहिष्णुता पर जारी बहस के बीच सोफिया रंगवाला जी का बयान – Statement of Sofiya Rangwala on Intolerance

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असहिष्णुता पर जारी बहस के बीच सोफिया रंगवाला जी का बयान

दोस्तों, आज कल भारत में चारों ओर केवल असहिष्णुता (Intolerance) पर बहस जारी है। अभी हाल में शाहरुख़ खान और आमिर खान ने भी इसके उपर बयान दिया है, हालाँकि इस बात पर उनकी काफी आलोचना भी हुयी। इसी कड़ी में बैंगलोर की एक Muslim Doctor ने भी फेसबुक पर अपना बयान शेयर किया है। कृपया इसे पढ़ें और अपने विचार रखें।
 मैं एक मुस्लिम महिला हूं और पेशे से डॉक्टर हूं। बंगलोर में मेरी एक high- end laser skin clinic है। मेरा परिवार Kuwait में रहता है। मैं भी कुवैत में पली बढ़ी हूं लेकिन 18 साल की उम्र में डाक्टरी की पढ़ाई करने के लिए मैं भारत लौट आयी थी। पढ़ाई खत्म होने के बाद जहां मेरे ज्यादातर साथी अच्छे भविष्य के सपने के साथ बाहर चले गये मैंने भारत में ही रहने का निश्चय किया। आज तक मैंने एक बार भी कभी यह महसूस नहीं किया कि एक मुसलमान होने के कारण हमें कोई दिक्कत हुई हो। मुझे अपने देश से प्रेम था और मैंने भारत में ही रहने का निश्चय किया।

मैंने डॉक्टरी की पढ़ाई कर्नाटक के Manipal से किया। जैसे सब अकेले रहते थे, मैं भी अकेली रहती थी। मेरे सारे Hindu Professors थे। आसपास जो लोग थे वे सभी हिन्दू थे। मैंने एक बार भी कभी यह महसूस नहीं किया कि मेरे साथ मुसलमान औरत होने के कारण भेदभाव हो रहा है। सब मेरे प्रति उदार रहते थे और कई बार तो वे यह अहसास दिलाने के लिए मैं उनके बीच का ही एक हिस्सा हूं, ज्यादा प्रयास करते थे। मणिपाल में सबने मुझे जरूरत से ज्यादा सहूलियत देने की कोशिश की।

मणिपाल में पढ़ाई खत्म होने के बाद मैं अपने पति के साथ बंगलौर में बस गयी। तब तक मेरी शादी हो चुकी थी और हमने तय किया कि हम बंगलौर में ही बसेंगे। ऐसा सोचने के पीछे एक कारण था। यहां मैं अपने पति के बारे में आपको बताना चाहूंगी। वे भी एक मुसलमान हैं। उनका पहला नाम इकबाल है। उन्होंने चेन्नई से M.Tech किया है और जर्मनी से Phd. वे Aerospace Engineer हैं। उनका काम ऐसा है कि वे भारत की सबसे सुरक्षित संस्थाओं जैसे DRDO, GTRE, ISRO, IISC, BHEL में आते जाते रहते हैं।

लेकिन कहीं भी आने जाने में आज तक उन्हें मुसलमान होने के कारण कभी कोई परेशानी नहीं हुई। ऐसी अति सुरक्षित जगहों पर आज तक एक बार भी उनकी ऐसी तलाशी नहीं ली गयी जिसके लिए अमेरिका जैसे आधुनिक देश बदनाम हो चुके हैं। उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि मुसलमान होने के कारण उनके साथ किसी तरह का भेदभाव किया गया हो। Modi Government आने के बाद भी नहीं। बल्कि नई सरकार आने के बाद तो सरकारी संस्थानों में सुरक्षा के उपाय और भी अनुशासित हुए हैं।

मेरे पति बताते हैं कि अमेरिका में ऐसा नहीं है। वे जब भी अमेरिका जाते हैं तो सिर्फ मुसलमान होने के कारण उनके ऊपर नजर रखी जाती है। इकबाल जब भी अमेरिका जाते हैं तो उन्हें कपड़े उतारकर तलाशी देनी पड़ती है। जर्मनी में जिन दिनों वे Phd. कर रहे थे उस वक्त भी उन पर एक मुसलमान होने के कारण गुप्त रूप से नजर रखी जाती थी। एक बार तो बाकायदा चिट्ठी भेजकर हमें सूचित किया गया कि आप पर नजर रखने के दौरान हमें कोई संदिग्ध गतिविधि नजर नहीं आई, इसलिए अब हम किसी प्रकार के संदेह के घेरे में नहीं हैं। मेरे पति अपने सहयोगियों के बीच पूरा सम्मान, समर्थन और मुहब्बत पाते हैं। और उनके सहयोगियों में सभी हिन्दू हैं। सरकार बदलने के बाद भी हालात में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसलिए Intolerance एक ऐसा शब्द है जो हमारे लिए कोई मायने ही नहीं रखता।

मोदी सरकार के बनने से थोड़ा समय पहले ही पिछले साल मैंने अपना Clinic खोला। मैं समय से अपना Tax भरती हूं और काम काज में कानूनों का पूरी तरह से पालन करती हूं। मैं अपने काम काज के दौरान ऐसा कुछ भी करने से बचती हूं जिसके कारण मेंरे ऊपर कोई मुसीबत आ सकती है। मैं बहुत आराम से अपनी Clinic चला रही हूं। मेरे ज्यादातर Hindu Patients हैं। Clinic का मेरा पूरा staff हिन्दू है। और मेरा विश्वास करिए, Clinic की देखभाल वे मुझसे ज्यादा अच्छी तरह से करते हैं। बीते बीस सालों में सरकारी गैर सरकारी बहुत सारी जगहों पर आना जाना हुआ है लेकिन मुझे आज तक कभी यह महसूस नहीं हुआ कि सिर्फ मुसलमान होने के कारण मेरे साथ कोई भेदभाव किया जा रहा है। शायद यही वह अपनापन है कि मैं अपने देश को नहीं छोड़ पा रही हूं। मेरा पूरा परिवार बाहर रहता है और बाहर जाने के लिए मुझे कुछ नहीं करना है सिर्फ एक बार कहना ही है। कुवैत सरकार की तरफ से clinic खोलने का मेरे पास open offer है जो मेरे लिए कमाई का यहां से ज्यादा बेहतर जगह हो सकती है। अगर मेरे साथ सिर्फ मुसलमान होने के कारण भेदभाव होता तो सारी संभावनाओं को नकारकर मैं यहां क्यों रहना चाहती?

मैं कुवैत में ही पली बढ़ी और चालीस साल से मेरा परिवार वहां रह रहा है लेकिन आज भी हम उनके लिए कुछ नहीं है। हमारे परिवार वाले आज भी बाहरी हैं और उन्हें वहां कोई अधिकार प्राप्त नहीं है। हमें नियमित तौर पर अपना Resident Visa Renew कराना पड़ता है। कानूनों में निरंतर बदलाव होता रहता है जिसके कारण जिन्दगी दिन ब दिन जटिल से जटिल होती जाती है। हमारे लिए यह जरूरी है कि उनके बनाये कानूनों का हम अनिवार्य रूप से पालन करें। ठीक है। इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन उनके कानून बनाये ही जाते हैं भेदभाव के आधार पर। हमारे साथ खुलेआम भेदभाव होता है। अरब के लोग अपने आपको पहले दर्जे का नागरिक मानते हैं, गोरे लोगों को दूसरे दर्जे का और एशियाई लोगों को तीसरे दर्जे का नागरिक मानते हैं। हालांकि हम वहां रहकर नाखुश नहीं है लेकिन वहां रहते हुए कभी लगता ही नहीं कि हमारा यहां से कोई ताल्लुक है। मैं जब कुवैत में रहती थी या अब भी जब मैं कभी कभार आती जाती हूं तो मुझे कभी वहां किसी प्रकार अपनापन महसूस नहीं होता है। हम मुसलमान हैं और एक मुसलमान देश में जाते हैं फिर भी हमे भारतीय समझा जाता है और किसी प्रकार की कोई अतिरिक्त सहूलियत नहीं दी जाती है।

मैंने बहुत पहले यह महसूस कर लिया था कि सिर्फ भारत ऐसा देश है जहां रहने पर उसके साथ अपनेपन का अनुभव होता है। आप America में हैं तो Indian American हैं, Canada में हैं तो Indian Canadian हैं, Britain में हैं तो Indian British हैं लेकिन सिर्फ भारत एकमात्र ऐसा देश हैं जहां आप हैं तो आप केवल भारतीय हैं। सिर्फ अपने घर में आप घर में होने जैसा अनुभव कर सकते हैं। मैं दुनिया के कई देशों में रही हूं और आती जाती रहूं लेकिन सिर्फ भारत में मुझे घर में रहने जैसा महसूस होता है। यही वह फर्क है जो एक भारतीय मुसलमान के लिए भारत को दुनिया के दूसरे देशों से अलग करता है।

तो, जो ये हीरो लोग असुरक्षित होने की बात बोल रहे हैं वे किस देश की बात कर रहे हैं? एक सामान्य नागरिक के रूप में मैं और मेरे पति ने आज तक किसी तरह का भेदभाव महसूस नहीं किया है तो फिर वह कौन सा भेदभाव है जो उनके साथ हो गया है? आमिर खान की पत्नी किरण राव किस बात से इतना डर गयी हैं? वे बड़े लोग हैं। मंहगे इलाकों में रहते हैं। उनके बच्चे बड़े से बड़े स्कूलों में पढ़ते हैं और उनके पास अपना निजि सुरक्षा तंत्र है जो चौबीसों घण्टे उनकी रखवाली करता है। मैं हर वक्त अकेले यात्रा करती हूं और मुझे आज तक कभी कहीं डर नहीं लगा। एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर मैं आमिर खान और शाहरुख खान से जानना चाहती हूं कि आखिर उन्होंने इतना गैर जिम्मेदार बयान क्यों दिया जिसके कारण देश के 18 करोड़ मुसलमानों की इमेज को धक्का लगा है? उनको यह आजादी किसने दिया है कि दुनिया में वे मेरे देश का नाम बदनाम करें कि भारत में मुसलमान सुरक्षित नहीं है? पाकिस्तान की हिम्मत कैसे हो गयी कि वह उन्हें अपने देश में बसने का न्यौता दे रहा है? ऐसे वक्त में जब मैं मुसलमानों के लिए अपने हिन्दू मित्रों की टिप्पणियां पढ़ रही हूं तो मुझे बुरा लग रहा है। मुझे डर लग रहा है कि हिन्दुओं को उकसाया जा रहा है कि वे अपनी वह सहिष्णुता और स्वीकार्यता छोड़ दें जिसके कारण बीते बीस सालों में मुझे कभी किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा। मुझे डर लग रहा है कि हमारे अपने मूर्ख और एहसान फरामोश लोगों की वजह से हमारी छवि इतनी खराब न हो जाए कि मैं अपने ही देश में बेगानी हो जाऊं। आखिर कब तक इस देश के बहुसंख्यक हिन्दू यह बदतमीजी बर्दाश्त करेंगे?

मुसलमानों के लिए यह वक्त है कि वे स्वतंत्रता और स्वीकार्यता की कीमत समझें। फिर भी अगर वे समझ नहीं पाते हैं तो मैं यही दुआ करूंगी कि मेरे हिन्दू भाइयों का धैर्य असीमित हो जाए और वह कभी भी खत्म न हो।

सोफिया रंगवाला जी का बयान फेसबुक पर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

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