परमाणु हथियारों से विश्व को खतरा – Terror Of Nuclear Weapons

Share this:
Nuclear weapons Hiroshima

दोस्तों, एक माचिस की तिल्ली किसी घर में खाना बनाने के लिए चूल्हा जलाने का काम करती है तो उसी माचिस की तिल्ली से किसी का घर भी जलाया जा सकता है। Modern Science को नयी दिशा देने वाले महान वैज्ञानिक “Albert Einstein” जब General Relativity का paper लिख रहे थे तब उन्होंने कभी नहीं सोचा था की उनका जादुई समीकरण E = mc 2 एक दिन मानवता को महाविनाश का हथियार भी थमा देगा। इस formula के आधार पे विध्वंस के उस हथियार की खोज हुई जिसे हम कहते हैं – “परमाणु बम – Nuclear Bomb”

 Nuclear Bomb, नाभिकीय विखंडन (Nuclear dismantling) तथा नाभिकीय संलयन (Nuclear fusion) पर आधारित ऐसा device है जिसमे रेडियोएक्टिव तत्वों (Radioactive elements) के परमाणुओ के केंद्र (Atoms Center) पर न्यूट्रॉनों की बौछार (Shower of neutrons) की जाती है। विखंडित न्यूट्रॉन (Dismantle Neutrons) दूसरे नाभिकों (Nuclear) पर प्रहार करते हैं और chain reaction शुरू हो जाता है और परिणाम स्वरुप blast में सूर्य के सतह (Sun’s surface) से लाखो गुना ज्यादा प्रचंड energy उत्पन्न होती है और वहां मौजूद चीजो को dismantle कर देती है। Radioactive Rays उस इलाके में मौजूद सभी जीवित कोशिकाओं (Living Cells) को नष्ट कर देती है और blast से उत्पन्न shock waves उस इलाके की सभी इमारतों को बर्बाद कर देती है और Atmosphere में व्याप्त Deadly radiation फिर वहां जीवन की उत्पत्ति वर्षो तक नहीं होने देता।

Hiroshima bombing in hindi
6 अगस्त 1945 को जब “Little Boy – Nuclear Bomb” को Hiroshima, Japan के ऊपर गिराया गया तो Uranium का सिर्फ 1.38% भाग ही dismantle हो पाया था अर्थात सिर्फ 0.7 gram का यूरेनियम, एक 100 रूपए के नोट के वजन से भी हल्की सामग्री से उत्पन्न हुआ blast एक क्षण में 90000 लोगों को मारने के लिए काफी था। जो बच गए उनकी औलादें आज तक Infected हैं, वहां की जमीन आज तक बंजर (wasteland) है और इस तबाही के निशान आज भी वहां देखे जा सकते हैं।
 
आज जब दुनिया में हजारों Nuclear bombs बनाये जा चुके हैं जिनकी Destructive capacity, Hiroshima में गिराये first Nuclear bomb से million times ज्यादा है तो दुर्घटनाएं होना स्वाभाविक है। ऐसे में एक सवाल मन में उठता है की क्या हो अगर Nuclear reactors में आग लग जाए ? या कोई miscommunication हो जाये ? या कोई पागल अफसर ये इरादा बना ले के उसे आज तबाही देखनी है ? या क्या होगा अगर कोई गलती से ऐसा bomb कहीं गिरा दे?
23 जनवरी 1961 को 4 mega ton के Nuclear bomb को ले जाते USB-62 नामक एक American Bomber Aircraft अपना नियंत्रण खो कर North Carolina में गिर पड़ा और Nuclear fusion शुरू हो गया, luckily उस दिन सिर्फ एक safety switch ऐसा था जो on होने से रह गया था। सिर्फ एक switch, नहीं तो America का उस दिन इतिहास और भूगोल बदल गया होता क्योंकि ये बम Hiroshima पर गिराये गए बम से 260 गुना शक्तिशाली था।
9 अगस्त 1945 – हिरोशिमा में प्रथम परमाणु बम गिराने के बाद Charles Sweeney जिसने पहला bomb गिराया था, उसे कोकुरा (Kokura) नामक शहर पर दूसरा Nuclear bomb “Fatman” गिराने का आदेश मिला पर हवा में एक घंटे चक्कर लगाने के बावजूद bad weather के कारण वह रास्ता भटक गया और उसे different target की और जाने को कहा गया -” Nagasaki ” जहाँ अगले ही क्षण 80000 लोगों की लाशें बिछ गई।
Better world & science
आज 21st Century में हम लोगो का purpose है की हम Class-1 या Class-2 civilization बनने की ओर कदम उठाएं, एक ऐसी सिविलाइज़ेशन जो Nature’s Factors को control कर पाये, जो सितारों से खेल पाये, चाँद और मंगल (Moon & Mars) पर अपनी colonies को establish कर पाये पर problem वहां पहुचने के बाद नहीं बल्कि problem तो इसी वक़्त सर पर तलवार बन के लटक रहा है।
 
आज विज्ञान ने हमें development के opportunities दिए हैं, New Inventions, Technologies और Fundamental ideas हमारे चारो और बिखरे पड़े है पर साथ साथ हम Nuclear weapons के ढेर पर भी बैठे हैं। वो weapons जो एक झटके में पृथ्वी पर महाविनाश (Mass destruction) ला सकते हैं।

जब भी हम News Papers के pages पलटते हैं तो अक्सर एक ऐसे future world को देखते हैं जिसे “Planet Human” कहना ज्यादा proper है, जहाँ Country borders तोड़ सब एक दूसरे के लिए खड़े हो कर एक दूसरे का साथ दे कर एक fear-free society बनाने के ideas पर काम करते दिखते हैं पर एक दूसरी problem भी है जो हमें आगे नहीं ले जाना चाहती बल्कि Middle Ages के dark past में धकेल देना चाहती है और जिसका नाम है – “आतंकवाद – Terrorism”

Development और Terrorism की इस लड़ाई में हम उम्मीद करते हैं की हम इस लड़ाई में winner के तौर पे उभरें और ये fight आज से नहीं हमेशा से है।

Religion और Science का जन्म ही humanity welfare के लिए होता है, पर history गवाह है की एक महान अच्छाई ही हमेशा महान बुराई के रूप में उभरती है और संसार के विनाश का कारण बनती है और आज जो विश्व का scenario हमारे सामने है वहां religion के नाम पर science को weapon बना कर Terrorism, World को destroy कर देना चाहता है। जब भी हम रात के अँधेरे में अपने ऊपर चमकते खूबसूरत सितारों को देखते हैं तो अक्सर दिमाग में एक thought आता है की Why we are alone?

14 billion year पहले जन्मे इस Infinite Universe में सिर्फ हमारी Galaxy- Milky Way में ही billions of planets ऐसे है जिनमें life के लिए basic elements मौजूद है, तो पिछले 14 billion years में क्यों कोई Class-2 civilization के level पर नहीं पहुंच पाई? क्यों आज तक हमें कही किसी और दुनिया के signals का इन्तजार है?  जवाब शायद थोड़ा depressing हो सकता है ,शायद universe में Class-0 civilizations ही ज्यादा व्यापक है क्योंकि जब मनुष्य development के direction में एक कदम ऊपर चढ़ता है तो Suicide का सामान भी खुद तैयार करता है। शायद कभी एक ऐसा वक़्त आये जब हम Inter-Galactic Travel (एक आकाशगंगा से दूसरे आकाशगंगा का सफर) के लायक हो और कुछ ऐसे planets ढूंढ पाएं, जहा ruins of Class-0 civilization, Radiation, और Mass-Destruction के footprint हमें देखने को मिले, एक ऐसी civilization जो एक कदम ऊपर बढ़ने से पहले ही finished हो गई। 

(Class-0, Class-1 and Class-2 Civilization के बारे में ज्यादा जानने के लिए पिछला पोस्ट – पृथ्वी का भविष्य 5000 सालों के बाद – Earth Future After 5000 Years पढ़ें या यहाँ Click करें)
 
आज जो हम इस ब्रह्माण्ड के बारे में सीखते है या जानते है वो एक key के समान है -“A Key To Heaven”
पर वही key नरक का दरवाजा भी खोलती है। Titan-2 Missile का invention, deadly nuclear weapons के launching के लिये किया गया था, पर इसी ने उन Astronauts को space में पहुचाया जिन्होंने बाद में Moon पर Human-Civilization के footprint बनाये। Science हमें नहीं बताता की keys का use कैसे करना है।


Science दुनिया को बेहतर बनाता है और यही दुनिया का destruction भी करता है। पर हमें अपने Ancestors के द्वारा बताये गए Heaven जाना है या Hell, इसका चुनाव science को नही… हमें करना है।
साभार – श्री विजय सिंह ठकुराय के फेसबुक वाल से

Share this:

Leave a Reply