मदरसों पर प्रतिबन्ध और तुर्की – Ban on Madarsa & Turkey

Share this:
Ataturk hindi

दोस्तों, महाराष्ट्र सरकार ने अभी कुछ दिनों पहले ही मदरसा पर प्रतिबन्ध लगा दिया है, उनका तर्क है की मदरसा में केवल इस्लामिक शिक्षा की जानकारी देती है और आजकल के शिक्षा पद्धति के अनुसार वहां पर Math, Science और अन्य Subjects की पढाई नहीं होती। इस फैसले के समर्थन और विरोध में अनेक लोग खड़े हो गए हैं, कुछ लोग कह रहे हैं की यह एक सही decision है तो वहीँ कुछ लोग इस decision को इस्लाम विरोधी और गलत बता रहे हैं। Social Media जैसे Facebook, Twitter पर भी लोग अपने अपने हिसाब से इसके पक्ष और विपक्ष में अपनी बातें रख रहे हैं, इन्ही Social Media चिंतकों में से एक हैं – श्री अजित सिंह जी जो की एक पहलवान रह चुके हैं और वर्तमान में “उदयन – Udayan” जो की समाज के वंचित वर्ग के बच्चों की पढाई के लिए समर्पित है, उसके प्रधान सेवक हैं। उन्होनें भी इस विषय पर अपनी राय रखी है, जिसे हम यहां पर आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं :-

Turkey या तुर्की 20वीं सदी में ,जो की एक जाहिल इस्लामिक देश था वहाँ एक राष्ट्रपति हुए -मुस्तफा कमाल अतातुर्क (Mustafa Kemal Atatürk)। उन्होंने 10 साल के अन्दर Turkey को एक जाहिल इस्लामिक देश से एक Modern पढालिखा progressive देश बना दिया।

madarsa hindi

सबसे पहले उन्होंने एक अभियान चलाया और Turkey को उसकी अरबी जड़ों से काट के तुर्की-आत्मसमान को जागृत किया। सबसे पहले उन्होंने देश में अरबी भाषा पे प्रतिबन्ध लगा दिया। अरबी लिपि को त्याग कर Latin आधारित नयी लिपि तुर्की भाषा के लिए विकसित की। उन्होंने देश के शिक्षाविदों(Educationist) से पूछा , हम कितने दिनों में पूरे देश को नयी तुर्की लिपि सिखा देंगे ? 3 से 5 साल में ? राष्ट्रपति ने कहा 3 से 5 महीने में करो ये काम, उन्होंने कुरआन शरीफ को नयी तुर्की लिपि में लिखवाया। मस्जिदों से अरबी अजान बंद कर दी गयी। अब अजान तुर्की भाषा में होती थी। अतातुर्क ने कहा हमें अरबी इस्लाम नहीं चाहिए, हमें तुर्की इस्लाम चाहिए। हमें अरबी भाषा में कुरआन रटने वाले मुसलमान नहीं चाहिए बल्कि तुर्की भाषा में कुरआन समझने वाले मुसलमान चाहिए।

उन्होंने Turkey को Islamic State से एक Secular State बना दिया। उन्होंने इस्लामिक शरियत की शरई courts जो सदियों से चली आ रही थी उन्हें बंद कर दिया और तुर्की का नया कानून बनाया जो इस्लामिक न हो के modern था।
इसके बाद उन्होनें Muslim Civil Code को abolish कर Turkish Civil Code बनाया। मौखिक तलाक गैर कानूनी कर दिया, 4 शादियाँ गैर कानूनी कर दी और family planning अनिवार्य कर दी।

अतातुर्क ने पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था बदल दी। नयी तुर्की लिपि में पाठ्य पुस्तकें लिखी गयी। मदरसों और दीनी इस्लामिक शिक्षा पे प्रतिबन्ध लगा दिया गया। पूरी तुर्की में modern शिक्षा को अनिवार्य कर दिया गया। नतीजा ये निकला की सिर्फ 2 सालों में देश में साक्षरता 10% से बढ़ के 70 % हो गयी।

सबसे बड़ा काम जो अतातुर्क ने किया वो देश के इस्लामिक पहनावे और रहन सहन को बदल दिया। इस्लामिक दाढ़ी, कपडे, पगड़ी प्रतिबंधित कर दी। पुरुषों को पगड़ी की जगह Hat पहनने की हिदायत दी गयी। महिलाओं के लिए हिजाब, नकाब, बुर्का प्रतिबंधित कर दिया। देखते देखते महिलाएं घरों से बाहर आ के पढने लिखने लगी और काम करने लगी, पर्दा फिर भी पूरी तरह ख़तम न हुआ था। इसके लिए अतातुर्क ने एक तरकीब निकाली। वेश्याओं के लिए बुर्का और पर्दा अनिवार्य कर दिया। इसका नतीजा ये निकला की जो थोड़ी बहुत महिलाएं अभी भी परदे में रहती थी उन्होंने एक झटके में पर्दा छोड़ दिया। 
अतातुर्क ने रातों रात देश की महिलाओं को इस्लामिक जड़ता और गुलामी से मुक्त कर दिया, उन्होंने महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा दिया। 1935 के आम चुनावों में तुर्की में 18 महिला सांसद चुनी गयी थी। ये वो दौर था जब की अभी बहुत से यूरोपीय देशों में महिलाओं को मताधिकार तक न था।

ban madarsa

मुस्तफा कमाल अतातुर्क ने सिर्फ 10 साल में Islamic Ottoman empire के एक जाहिल देश को एक modern देश बना दिया था।

ऐ भारत के मुसलमानों, आज एक मौक़ा तुम्हे भी मिल रहा है इस्लामिक जहालत से मुक्त होने का। मदरसों से हटा के अपने बच्चों को स्कूल भेजो। फैसला तुम्हे करना है। तुम्हारी अपनी leadership ने तो तुम्हें जानबूझ कर आज तक जाहिल रखा है, वो आज भी आपको जाहिल ही रखना चाहते हैं। आज भारत में भी एक अतातुर्क आया है जो आपको एक सम्मानजनक जीवन देना चाहता है, फैसला आपको ही करना है।

खुदा हाफ़िज़।

साभार – श्री अजित सिंह जी


श्री अजित सिंह जी के Facebook Profile का link – https://www.facebook.com/SinghCorpt
उदयन – Udayan के Facebook Profile का link – https://www.facebook.com/Udayan.Ghazipur?pnref=lhc

See More:

Share this:

Comments(3)

  1. July 6, 2015
  2. July 6, 2015
  3. July 6, 2015

Leave a Reply to Abhas Pandey Cancel reply