इबोला वायरस : इसे जानें और महामारी से बचें – Ebola virus: Learn it and avoid epidemic

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दोस्तों और मेरे आदरणीय पाठकों, Ebola Virus बीमारी की विभीषिका की वजह से ही विश्व स्वास्थ संगठन (World Health Organization) ने इसे अंतराष्ट्रीय महामारी घोषित किया है। Ebola एक Virus है। यह वर्तमान में एक गंभीर बीमारी का रूप धारण कर चुका है। इस बीमारी में शरीर में नसों से खून बाहर आना शुरु हो जाता है, जिससे internal bleeding प्रारंभ हो जाती है। यह एक अत्यंत घातक रोग है।इसमें 90% रोगियों की मृत्यु हो जाती है। इस रोग की पहचान सर्वप्रथम सन 1976 में इबोला नदी के पास स्थित एक गाँव में की गई थी। इसी कारण इसका नाम Ebola पड़ा।

रोग फैलने के कारण – Cause of Spread
Ebola Virus किसी संक्रमित व्यक्ति के खून, मल या पसीने से सीधे संपर्क में आने से फैलता है। यह virus यौन संपर्क और virus affected dead body को गलत तरीके से dispose करने से भी फैल सकता है। यह संक्रामक रोग है। पूरी दुनिया में खौफ पैदा करने वाले और 900 से ज्यादा लोगों की जान लेने वाला “Ebola” आखिर आया कहां से इसका जवाब मिलता नजर आ रहा है। 
Researchers की एक टीम का कहना है अफ्रीकी देशों में तेजी से फैल रहा यह वायरस एक दो साल के बच्चे से फैला था। एक अंग्रेजी टीवी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2013 में 6 दिसंबर को गिनी देश के एक गांव में एक दो साल के बच्चे की मौत हो गई थी और उसके एक सप्ताह बाद ही उसकी मां की भी मौत हो गई। इतना ही नहीं यह वायरस इतनी तेजी से फैला कि इस वायरस ने बच्चे की 3 साल की बहन और दादी को भी अपनी चपेट में ले लिया। इन सभी लोगों को उलटी, डायरिया और बुखार की शिकायत हुई थी। साथ ही बताया कि बच्चे की दादी का अंतिम संस्कार करने पहुंचे दो लोग भी इस वायरस की चपेट में आ गए और इनका इलाच करने वाला एक डॉक्टर भी इबोला का शिकार हो गया। अभी तक इस वायरस की चपेट में 17 सौ से ज्यादा लोग आ चुके हैं और 900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अफ्रीकी देश गिनी में दर्जनों लोगों की मौत के बाद साल 2014 में मार्च महीने में इस वायरस के बारे में पता चला। जिसके बाद यह अफ्रीका के दूसरे देश लाइबेरिया और सियरा लियोन पहुंच गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि इस पर काबू पाने में कई महीने लगेंगे और हजारों स्वास्थ्य कर्मियों की जरूरत होगी।
लक्षण – Symptoms
इसके लक्षण हैं- उल्टी-दस्त, बुखार, सिरदर्द, ब्लीडिंग, आँखें लाल होना और गले में कफ़। इबोला वायरस के शरीर में प्रवेश करने के दो से 21 दिन के बीच मरीज कमजोर होने लगता है. बुखार आता है, लगातार सरदर्द और मांसपेशियों के दर्द की शिकायत रहती है. भूख मर जाती है, पेट में दर्द रहता है, चक्कर आने लगते हैं और उल्टी दस्त भी होते हैं. बहुत तेज बुखार के बाद रक्तस्राव और खून की उल्टियां भी शुरू हो जाती हैं. आंतड़ियों, Spleen यानि तिल्ली और फेंफड़ों में बीमारी फैल जाने के बाद मरीज की मौत हो जाती है. अक्सर इसके लक्षण प्रकट होने में तीन सप्ताह तक का समय लग जाता है। इस रोग में रोगी की त्वचा गलने लगती है। यहाँ तक कि हाथ-पैर से लेकर पूरा शरीर गल जाता है। ऐसे रोगी से दूर रह कर ही इस रोग से बचा जा सकता है।
उपचार – Treatment
Ebola virus के खिलाफ वैज्ञानिक अब तक कोई टीका नहीं बना पाए हैं और ना ही कोई इसे खत्म करने के लिए बाजार में कोई दवा उपलब्ध है. इसकी रोकथाम का केवल एक ही तरीका है, जागरूकता. इसका कोई anti-virus भी नहीं है। WHO के मुताबिक, Ebola एक किस्म की viral बीमारी है. Ebola virus का संक्रमण होने पर तेज बुखार आता है. खून बहने लगता है. इसके अन्‍य लक्षण हैं कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश. संक्रमित व्यक्ति की मौत की आशंका 90 प्रतिशत तक होती है. इस समय 55 से 60 प्रतिशत संक्रमित लोगों की मौत हो चुकी है. San Diego के Map Bio-Pharmaceutical की बनाई Zmap दवा के बंदरों पर अच्छे नतीजे सामने आए हैं. अफ्रीका में संक्रमित हुए दो अमेरिकियों की सेहत में भी इस दवा से सुधार आया है.विशेषज्ञों के मुताबिक Ebola एक खतरनाक व जानलेवा virus है। Virus संक्रमित होने के बाद व्यक्ति की मौत की आशंका 90 फीसदी तक होती है। अब तक इस पर कोई Antibiotic कारगर नहीं है और न ही इलाज के बाद बीमारी असर कम होता देखा गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की कोशिश है कि लोगों को समझाया जा सके कि इबोला के मामलों को दर्ज कराना कितना जरूरी है.
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सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । 
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥
साभार – डॉ.स्वास्तिक, चिकित्सा अधिकारी – आयुष विभाग , उत्तराखंड शासन

डॉ.स्वास्तिक के बारे में – डॉ. स्वास्तिक जैन आयुर्वेद चिकित्सा तथा लोक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक जाना माना नाम होने के साथ-साथ बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। इनका पूरा परिवार आयुर्वेद / पारंपरिक पद्धति से लोक कल्याण के लिए जनसुलभ चिकित्सा प्रदान करने के उद्देश्य से विगत लगभग 75 वर्षों से उत्तर प्रदेश के बदायूं जनपद में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा है। आप वर्तमान में परिवार की तीसरी पीढ़ी के आयुष चिकित्सक हैं। प्रतिष्ठित गुरुकुल कांगड़ी कॉलेज हरिद्वार से आयुर्वेद में डिग्री पूर्ण करने के बाद आप पतंजलि योगपीठ हरिद्वार में आयुष चिकित्सक के पद पर रहे। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की इच्छा के कारण आपने स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन में एमबीए किया। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने तथा उसके प्रबंधन के लिए आपने ग्रामीण विकास संस्थान -हिमालयन इंस्टिट्यूट जौलीग्रांट देहरादून में कार्यरत रहते हुए लोक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य प्रबंधन, स्वास्थ्य संबंधी रिसर्च, प्रशिक्षण, टेलीमेडिसिन तथा विभिन्न पब्लिक हेल्थ की सेवाओं में वरिष्ठ समन्वयक (चिकित्सा) के रूप में योगदान दिया। वर्तमान में आप लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित होकर उत्तराखंड शासन में प्रभारी चिकित्सा-अधिकारी के रूप में आयुर्वेद विभाग में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
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