सचिन तेंदुलकर की आखिरी टेस्‍ट मैच के बाद का विदाई भाषण हिंदी में – Sachin Tendulkar Hindi Farewell Speech

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दोस्तों और आदरणीय पाठकों, अपनी कहानी ” सचिन रमेश तेंदुलकर” और भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान को सलाम करता है। ये Post हम उन्हें समर्पित करते हैं।  

24 वर्षों तक चले अपने क्रिकेट करियर को जब सचिन रमेश तेंदुलकर ने अलविदा कहा तो वानखेड़े स्‍टेडियम में मौजूद हर शख्‍स की आंखें नम थीं।

आईये पढ़ते हैं सचिन तेंदुलकर की आखिरी टेस्‍ट मैच के बाद दी गई विदाई भाषण का हिंदी अनुवाद :

” कृपया बैठ जाइये नहीं तो मैं फिर से भावुक हो जाउंगा। पिछले 24 साल से मेरी जिंदगी 22 यार्ड के बीच गुजरी है. यह यकीन करना मुश्‍किल है कि उस शानदार सफर का आखिरी पड़ाव आ गया है. मैं सभी लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जिन्‍होंने मेरी जिंदगी में कोई न कोई भूमिका अदा की है. पहली बार मेरे हाथों में लिस्‍ट है. बात करना मुश्‍किल हो रहा है लेकिन मैं कोशिश करूंगा।

मेरी जिंदगी में सबसे महत्‍वपूर्ण इंसान जिनकी कमी मैं 1999 से महसूस करता आ रहा हूं – मेरे पिता। उन्‍होंने मुझे तब से आजाद रखा जब मैं सिर्फ 11 साल का था. अपने सपनों का पीछा करो लेकिन शार्टकट कभी मत लेना. इतना ही नहीं उन्‍होंने मुझे एक बेहतर इंसान बनने की नसीहत दी, जिसे मैंने अपनाया. जब भी मैंने बल्‍ला उठाया वह उनके लिए था.

मेरी मां-मुझे नहीं मालूम इतने शैतान बच्‍चे से वह कैसे पार पाती थीं. उनके अंदर ढेर सारा संयम होगा. पिछले 24 बरस जब मैं इंडिया के लिए खेला उन्‍होंने मेरा ख्‍याल रखा, इस से कहीं पहले वह मेरे लिए प्रार्थना करती आई हैं. प्रार्थना और सिर्फ प्रार्थना. मुझे मैदान पर जाने और परफार्म करने की शक्‍ति दी है. 
मेरे अंकल और आंटी ने मुझे बेटे की तरह पाला है. चार साल तक उनके साथ रहा. मैं उनके बेटे की तरह हूं और मुझे खुशी है कि यह ऐसे ही चला आ रहा है। 

मेरे बड़े भाई ज्‍यादा बात नहीं करते लेकिन एक बात जो उन्‍होंने हमेशा कही है कि उन्‍हें मालूम है कि मैं अपना 100 % दूंगा। मेरी बहन सविता ने मुझे मेरा पहला बल्‍ला दिया  था. वह उनमें से एक हैं जो जब मैं बल्‍लेबाजी कर रहा होता हूं उपवास रखती हैं.

अजित मैं आपके लिए क्‍या कह सकता हूं. उन्‍होंने मेरे लिए अपना करियर कुर्बान कर दिया. उन्‍होंने मेरे अंदर प्रतिभा की झलक देखी और मुझे मेरे कोच आचरकेर के पास ले गए. बीती रात को भी उन्‍होंने मुझे फोन किया और हम दोनों मेरे आउट होने  के बारे में चर्चा कर रहे थे, यह जानते हुए कि इस बात की थोड़ी सी गुंजाइश है कि शायद फिर बैटिंग करने को मिले. आदत जो शायद जन्‍म से है. अब जब मैं क्रिकेट नहीं खेलूंगा, हम शायद टेक्‍निक के बारे में बात करें. अगर वह चर्चाएं नहीं रहीं होती तो शायद मैं कम बेहतर क्रिकेटर बन पाता.

1990 में मेरी जिंदगी में सबसे खूबसूरत लम्‍हा आया जब मेरी अपनी पत्‍नी अंजलि से मुलाकात हुई. जब हमने घर बसाने का फेसला किया, तो उसने कहा वह उसका ख्‍याल रखेगी. तुम क्रिकेट खेलो. मेरा साथ निभाने और मेरी बकवास सुनने के लिए शुक्रिया. तुम मेरी जिंदगी की सबसे बढ़िया पार्टनरशिप जो मैंने कभी की है.

सारा और अर्जुन मेरी जिंदगी के दो अनमोल नगीने हैं. वह बड़े हो गए हैं. मेरी बेटी 16 साल की है, मेरा बेटा 14 साल का है. वक्‍त पंख लगाकर उड़ गया. मैंने हमेशा विशेष अवसरों जन्‍मदिन, स्‍पोर्ट्स डे, छुट्टियों के वक्‍त उनके साथ समय बिताना चाहा. उन सब चीजों को मैंने मिस किया है. तुम्‍हारी समझदारी के लिए शुक्रिया.

मैं वादा करता हूं अगले 16 साल या उसके बाद जो भी आएंगे तुम्‍हारे लिए हैं. आपके लिए एक मजबूत परिवार का होना और उसका राह दिखाते रहना बेहद महत्‍वपूर्ण है. अंजलि से शादी की इजाजत देने के लिए मेरे सास-ससुर का शुक्रिया.

मेरे पुराने दोस्‍त सब छोड़ छाड़कर नेट पर मुझे गेंद फेंकने आते रहे हैं. जब मुझे चोट लगी थी और लग रहा था कि मेरा करियर खत्‍म होने वाला है, वह सुबह 3 बजे भी मेरा फोन उठाते. मेरे पास होने के लिए शुक्रिया.

मेरी जिंदगी में मील का पत्‍थर तब आया जब मेरे भाई मुझे कोच के पास ले गए, आचरेकर. उन्‍हें स्‍टैंड में देखकर मैं खुशी से भर उठा था. आमतौर पर वह सारे मैच टेलीविजन पर ही देखते हैं.

सर मुझे पूरा मुंबई घुमाते और सुनिश्‍चित करते कि मैं मैच प्रैक्‍टिस कर सकूं. मजाक में कह रहा हूं, सर ने कभी मुझसे नहीं कहा वेल प्‍लेड क्‍योंकि उन्‍हें लगता था कि मैं आत्‍मसंतुष्‍ट हो जाऊंगा और मेहनत नहीं करूंगा. अब शायद वह मेरे करियर के लिए वेल प्‍लेड कह सकते हैं.

मुझे न्‍यूजीलैंड से सुबह 4 बजे लौटने और फिर 9 बजे मैच के लिए हाजिर होना याद है इसलिए नहीं कि किसी ने मुझसे वहां रहने के लिए कहा बल्‍कि मैं वहां अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता था. मुंबई क्रिकेट का शुक्रिया.

मुझ में भरोसा जताने के लिए सभी सेलेक्‍टर्स और यहां अपनी बात रखने की आजादी देने के लिए बीसीसीआई का शुक्रिया. मैं आप सभी का तहेदिल से शुक्रगुजार हूं विशेषकर उस समय जब मैं चोटिल था. कई सीनियर्स ने मुझे क्रिकेट खेलने और सही तरीके से खेलने के लिए प्रेरित किया. मैं उनके साथ नहीं खेल सका लेकिन मेरे दिल में उनके और उनके खेल के लिए सम्‍मान है.

राहुल, लक्ष्‍मण, सौरव अनिल आज यहां नहीं हैं. मेरी टीम. आप सब घर से दूर मेरा परिवार हैं. ड्रेसिंग रूम से दूर होना और उन लम्‍हों को न जी पाना बेहद मुश्‍किल होने जा रहा है.

मुझे लगता है कि हम सब इंडियन क्रिकेट टीम का हिस्‍सा होकर देश की सेवा कर पाने के लिए भाग्‍यशाली और गर्व महसूस करते हैं. मुझे मालूम है कि आप सब सही भावना और सही मूल्‍यों के साथ देश की सेवा करना जारी रखेंगे. मेरा विश्‍वास है कि हम भाग्‍यशाली हैं कि खेल का खयाल रखने के लिए ऊपर वाले ने हम सबको चुना है. हर पीढ़ी के पास खेल का खयाल रखने का मौका आता है. मुझे पूरा विश्‍वास है कि आप सही भावना के साथ देश और खेल की सेवा करना जारी रखेंगे.

मुझे सेहतमंद रखने के लिए सभी डॉक्‍टर्स का शुक्रिया. मेरे प्‍यारे दोस्‍त, स्‍व. मार्क मास्‍करहंस, मेरे पहले मैनेजर. वह क्रिकेट, मेरे क्रिकेट विशेषकर इंडियन क्रिकेट के well wisher थे. वह समझते थे कि देश का प्रतिनिधित्‍व करना क्‍या होता है. उन्‍होंने कभी मुझ पर वह करने का दबाव नहीं डाला जो sponsors मुझसे कराना चाहते थे. आज, मैं उन्‍हें मिस कर रहा हूं. शुक्रिया Mark.

मेरी वर्तमान मैनेजमेंट टीम WSG ने मेरी जरूरतों को समझा और वहां से आगे बढ़े जहां मार्क ने छोड़ा था. शुक्रिया WSG. उनके मैनेजर विनोद के लिए भी एक बड़ा शुक्रिया. साथ ही मीडिया के लिए भी जिसने हमेशा मेरा साथ दिया. इसका मेरे ऊपर बेहद सकारात्‍मक असर पड़ा है.

मुझे लगता है कि मेरा भाषण कुछ ज्‍यादा ही लंबा हो गया.

मैं आप सभी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं. आपका सपोर्ट मेरे दिल के करीब और मेरे लिए बेशकीमती है. मैं इतने सारे लोगों से मिला हूं, जिन्‍होंने मेरे लिए उपवास रखा, मेरे लिए प्रार्थना की. इस सबके बिना मेरी जिंदगी आज वह नहीं होती जो है. वक्‍त पंख लगाकर उड़ जाता है, लेकिन आप लोगों ने मेरे लिए जो यादें छोड़ी हैं वह हमेशा मेरे साथ रहेंगी. विशेषकर सचिन सचिन की वह आवाज जो आखिरी सांस तक मेरे कानों में गूंजती रहेगी. 

शुक्रिया. अगर मुझसे कुछ छूट गया है तो मेरा मानना है कि आप समझ सकेंगे.”

साभार – एक Facebook मित्र

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One Response

  1. November 21, 2013

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