फेसबुक एक भ्रमजाल है, क्यों – Why Facebook is a Paradox?

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दोस्तों, और मेरे आदरणीय पाठकों, आज के इस Post में हम इस बात को जानने की कोशिश करेंगे की फेसबुक (Facebook) एक भ्रमजाल (Paradox) क्यों है? खैर, सबसे पहले यह जान लेते हैं की Facebook दुनिया में Google के बाद दूसरी सबसे ज्यादा search की जाने वाली website है। 
इसे बनाने वाले दुनिया के youngest billionaire Mark Zukerberg ने भी कभी नहीं सोचा था की ये इतनी जल्दी इतनी popular हो जाएगी. In fact, अगर आप Facebook पर नहीं  हैं तो लोग आपको आश्चर्य से देखते  हैं. ..”Facebook पर नहीं है…जी कैसे रहा है…… :)”

आज Facebook पर 1 billion+ registered user हैं, यानि दुनिया का हर सातवाँ आदमी Facebook पर है and in all probability आप और मैं भी उन्ही में से एक होंगे और शौक से Facebook use करते होंगे, पर जो सोचने की बात है वो ये कि क्या आप Facebook use करते हैं, या overuse  करते हैं …या फिर कहीं आप इसके addict तो नहीं !

Let’s say use करने का मतलब है कि आप Facebook पर daily 1 घंटे से कम समय देते हैं ,और overuse करने का मतलब है 1 घंटे से ज्यादा और  हाँ, use करने से बस ये मतलब नहीं है कि आप physically system के सामने या अपने smart phone को हाथ में लेकर use करते हैं even अगर आप Facebook के बारे में सोचते हैं तो वो भी time usage में count होगा, after all वो उतने देर के लिए आपका mind space occupy कर रहा है।

और अगर आप सोच रहे हैं कि कहीं मैं addict तो नहीं हूँ तो इन traits को देखिये, अगर ये आप में हैं तो आप addict हो सकते हैं :

  • आप का दिमाग अकसर इसी बात में लगा रहता है कि आपकी पोस्ट की गयी चीजों पर क्या comment आया होगा? कितने लोगों ने like किया होगा?
  • आप बिना मतलब बार-बार Facebook screen refresh करते हैं कि कुछ नया दिख जाए
  • अगर थोड़ी देर आपका internet नहीं चला तो आप updates चेक करने cyber cafe चले जाते हैं या दोस्त को phone करके पूछते हैं
  • आप toilet में भी mobile या laptop लेकर जाते हैं कि Facebook use कर सकें
  • आप सोने जाने से पहले सभी को Good Night  करते हैं और सुबह उठ कर सबसे पहले ये देखते हैं की आपकी good night पर क्या reactions आये

अब मैं आपको अपने usage के बारे में बताता हूँ , on an average मैं daily 30 minutes से भी कम Facebook use करता हूँ including Facebook के बारे में सोचने का time. हाँ, इसे आप under usage भी कह सकते हैं 🙂 In my opinion ideally Facebook आधे घंटे से अधिक नहीं use करना चाहिए पर फिर भी मैंने over usage को 1 घंटे से ऊपर रखा है.

और, अब आपकी बात करते हैं, आप कितनी देर Facebook use करते  हैं?

Well, अगर ये daily 1/2 घंटे से अधिक है तो आप अपना time waste कर रहे हैं, unless until आप purposefully ऐसा कर रहे हैं. Purposefully means आप अपना business या business page promote कर रहे हैं, किसी social cause के लिए campaign चला रहे हैं या कोई और meaningful काम कर रहे हैं , इन cases में अपना टाइम देना worth है.

किस  तरह  के  लोग  Facebook ज़रुरत  से  अधिक  use करते  हैं :

In my opinion :

• जिनके पास कोई meaningful goal नहीं  है यानी the wanderers
• जो  लोगों का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं यानी the attention seekers
• जो अपनी life से अधिक दूसरों की life में interest रखते  हैं यानी the peepers

क्या नुकसान कर सकता है Facebook का over usage  ?

दोस्तों, इसकी list तो खैर बहुत लम्बी है लेकिन आज मैं आपके साथ 7 ऐसे points share कर रहा हूँ , तो आइये जानते हैं इन्हें:

1) आप  unknowingly अपनी happiness का control दूसरों को दे देते हैं ? –  कैसे? 

दरअसल अब आपकी happiness इस बात पर depend करने लगती है कि Facebook पर आपकी बातों, आपकी photos को कितने लोग like कर रहे हैं, कितने  लोग उस पर comments कर रहे हैं, कैसे comments कर रहे हैं etc. For instance आपने एक नई watch ली और उसकी photo post की, obviously आपको watch बहुत पसंद थी इसलिए आपने ली, पर जब Facebook पर उसे अधिक लोग like नहीं करते और कोई  उसका मज़ाक बना देता है तो आप दुखी हो जाते हैं, और उसका उल्टा भी सही है, आप को कोई चीज पसंद नहीं है पर बाकी लोग उसको अच्छा कह देते हैं तो आप खुश हो जाते हैं, so in a way आप अपनी happiness का control अपने Facebook friends को दे देते हैं . मैं ये नहीं कहता कि ये सभी के साथ होता है पर इतना ज़रूर है कि हम कहीं न कहीं इन चीजों से affectहोते हैं.

And over a long period of time,  ये छोटे छोटे effects बड़े होते जाते हैं और हमें पता भी नहीं चलता कि हम अपना real self कहाँ छोड़ आये.

2) आपको दूसरों की blessings और अपनी shortcomings दिखाई देने लगती है ?

Facebook पर लोग generally अपनी life की अच्छी अच्छी बातें ही share करते हैं, लोग अपने साथ हो रही अच्छी चीजें बताते हैं, उनके status कुछ  ऐसे  होते  हैं – “ My new phone” , “ Lost in Australia”..etc

In reality आप भी ऐसा ही करते हैं, पर अन्दर ही अन्दर आप अपनी असलीयत भी जानते हैं,पर दूसरों के case में आप वही देखते हैं जो वो आपको दिखाते हैं , आपको उनकी नई car नज़र आती है पर उसके साथ आने वाला EMI नहीं, आपको friend का swanky office तो दीखता है पर उसके साथ मिलने वाली tension नहीं, और ऐसा होने पर आप उनकी खुशियों को अपने ग़मों से compare करने लगते हैं और ultimately low feel करने लगते हैं.

Facebook की वजह से depression में जाने वालों की संख्या दिन ब दिन बढती जा रही है, just beware कि आप भी इसके शिकार न हो जाएं.

3) Real Friends और relationships suffer करते  हैं :

कई बार लोग बहुत proudly बताते हैं – ” Facebook पर मेरे 500 friends हैं  ” I am sure उनमे से आधे अगर सामने से गुजर जाएं तो वो उन्हें पहचान भी नहीं पायंगे. हकीकत में Facebook पर हमारे friends कम और acquaintances ज्यादा होते हैं. खैर ये कोई खराब बात नहीं है, लेकिन अगर हम इन more or less fake relations को ज़रुरत से अधिक time देते हैं तो कहीं न कहीं हमें अपनी family और friends को जो time देना चाहिए उससे compromise करते हैं . I know हमारे close friends और relations भी Facebook पर होते हैं, but frankly speaking Facebook पर वो भी हमारे लिए आम लोगों की तरह हो जाते हैं, क्योंकि Facebook तो एक भीड़ की तरह है, और भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता, जो सामने  पड़ा like किया , comment दिया और आगे बढ़ गए! Individuals को attention देना ये Facebook की आत्मा में ही नहीं है .

4) आप mainly addicts से communicate करने  लगते  हैं :

शायद आपने Pareto principle के बारे में सुना होगा…इस principle का कहना है कि 80% चीजों के लिए 20% चीजें जिम्मेदार होती हैं.

For eg. किसी company की 80% sales 20% customers की वजह से होती है.

ऐसा ही कुछ Facebook पर भी होता है …80% updates 20% लोगों  द्वारा  ही  की  जाती  है…और आप बार बार उन्ही से linkup होते रहते हैं …and basically ये वही Addict kind of लोग होते हैं जो बस Facebook से  चिपके ही रहते हैं और ऐसे लोगों से interact करना शायद ही कभी आपको काम की चीजें बता पाएं. ये mostly waste of time ही होता है.

5) आपको Socially active होने का भ्रम हो जाता है और reality इसके ठीक उलट होती है :

Facebook पर होने से कई लोग खुद को socially active समझने लगते हैं और friends को hi -bye कर के अपना role पूरा समझ लेते हैं .धीरे -धीरे ये बिलकुल mechanical हो जाता है…आप  Facebook पर  तो hi करते हैं लेकिन जब उसी दोस्त से college या office में मिलते हैं तो react भी नहीं करते…it is like आपकी online presence मायने रखती हो पर आपका खुद का मौजूद होना बेमानी हो .

और जब आप ऐसे behave करते हैं तो लोग आपको avoid करने लगते हैं और कहीं न कहीं आपको fake समझने लगते हैं यानि आपको तो लगता है कि आप सबसे touch में हैं पर इसके उलट आप अपना touch खोते जाते हैं .

6) आपकी health पर  बुरा असर पड़ता है :

Facebook पर लगे रहने से आपको physical और mental दोनों तरह की problem हो सकती हैं. आपकी आँखें कमजोर पड़ सकती हैं, गलत posture में बैठने से आपको spondylitis हो सकता है और depression में जाने का खतरा तो हमेशा ही बना रहता है.

7) आप अपनी life के सबसे energetic days को lazy entertainment में लगा  देते हैं :

Facebook use करने  वालों की demography देखी जाए तो इसे सबसे अधिक teens और twenties के young लोग use करते हैं . अगर आप इस age group से बाहर हैं तो ये point आपके लिए applicable नहीं है.

Teenage और twenties life का वो time होता है जब आपके अन्दर energy की कोई कमी नहीं होती, कभी सोचा है कि इस वक्त भगवान आपको सबसे अधिक energy क्यों  देते  हैं? क्योंकि ये हमारे life making years होते  हैं, इस  समय आपके सामने करने को बहुत कुछ होता है , पढाई का बोझ या घर की जिम्मेदारी उठाने का challenge, अपना career chose करने और competition beat करने  की कशमकश, अपने दिल कि सुनकर कुछ कर गुजरने की चाहत, parents के सामने हाथ फैलाने की जगह उनका हाथ थामने कि जिद्द और ये सब करने के लिए उर्जा चाहिए …energy चाहिए ; but unfortunately Facebook का over usage करने वाले उसे गलत जगह invest करते हैं . जहाँ उनके पास करने को इतने ज़रूरी काम हैं वो एक कोने में बैठ कर , and in ,most of the cases लेट  कर…अपनी life के ये energetic days एकदम unproductive चीज में लगा देते हैं .

Friends अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कि Facebook एक शोर-शराबे से भरे mall की तरह है …यहाँ थोडा वक़्त बीतायेंगे तो अच्छा लगेगा लेकिन अगर वहीँ घर बना कर रहने लगेंगे तो आपकी ज़िन्दगी औरों की आवाज़ के शोर में बहरी हो जाएगी. उसे बहरा मत होने दीजिये….अपना time अपनी energy कुछ बड़ा, कुछ valuable, कुछ शानदार करने में लगाइए और जब आप ऐसा करेंगे तो आपके इस काम को सिर्फ आपके friends ही नही बल्कि पूरी दुनिया Like करेगी


साभार – एक Gmail मित्र


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