पीपीएफ और एनपीएस से रिटायरमेंट को बनाएं खुशहाल – PPF & NPS for Happy Retirement

Share this:
apnikahaani.blogspot.com

दोस्तों और मेरे आदरणीय पाठकों, कहा गया है की आपका अगर एक पल बीत रहा है, तो इसका मतलब आप बुढ़ापे की ओर अग्रसर हैं। आने वाले 20 से 25 सालों के बाद भारत में दुनिया के मुकाबले सबसे अधिक बुजुर्ग (60+) होंगे। सामाजिक सुरक्षा के मामले हमारी सरकार की जो हालत है, वह किसी से छिपी नहीं है। वृद्धावस्था पेंशन के नाम पर 300 से 500 रुपये की रकम मासिक मिलती है, इतनी रकम में तो एक वृद्ध की एक माह की दवाई भी नहीं होगी। खाना और कपड़ा कहां से पूरा होगा। 10-20 साल बाद अगर पेंशन की राशि 1000 रुपये हो भी जाए, तो उस समय की महंगाई के हिसाब से उसका मूल्य आज के 100 रुपये के बराबर होगा। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्या किया जाय कि वृद्धावस्था में पैसे की कोई दिक्कत नहीं हो, किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़े, संतान के आगे भी नहीं।

अगर आप सोचते हैं कि आपकी संतान बुढ़ापे में आपका सहारा बनेगी और आपकी आर्थिक जरूरतें पूरी करेगी, तो आप भुलावे में हैं। ऐसा सोचना खुद को दिलासा देना है। संतान की कितनी भी अच्छी परवरिश हो, लेकिन कटु सत्य है कि कमाए हुए पैसे अपने मां-बाप पर खर्च करने में संतानों को बड़ी तकलीफ होती है,  बेशक आइसक्रीम पर पैसे लुटा दे, ऐसा मेरा मानना है।

अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म बागबान में अपने मां-बाप के प्रति बच्चों के रवैये जैसे गंभीर मसले को बड़े खूबसूरत ढंग से प्रस्तुत किए गए। रोजाना आपके सामने ऐसे उदाहरण आते हैं कि अमुक आदमी ने अपने मां-बाप को Old Age Home में छोड़ दिया, या वृंदावन में छोड़ दिया या घर से निकाल दिया आदि -आदि। हमारे देश में बुजुर्गों की दशा पर अभिनेता आमिर खान ने अपने शो सत्यमेव जयते में भी विस्तार से चर्चा की। कुल मिलाकर कहने का तात्पर्य है कि अगर आप अपने बुढ़ापे को खुशहाल बनाना चाहते हैं यानी जब आप कमाने के लायक नहीं रहेंगे, उस समय आपकी हर आर्थिक जरूरत आसानी से पूरी होती रहे और अपने बच्चों का दुत्कार भी नहीं सहना पड़े तो, इसके लिए आपको अभी से खुद तैयारी करनी होगी। आइए, आपको बुढ़ापे को बेफिक्र बनाने के लिए सरल उपाय बताते हैं।

बचत की दो योजनाएं हैं, जो बुढ़ापे में आपका सहारा बन सकती हैं। पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) और नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस)। दोनों ही लंबी अवधि की बचत योजनाएं हैं। पीपीएफ में कोई जोखिम नहीं है और इसकी ब्याज दरें प्रत्येक वर्ष तय की जाती है, जबकि एनपीएस में डेट के अलावा इक्विटी में निवेश का विकल्प भी होता है जिससे पीपीएफ की तुलना में बेहतर रिटर्न मिल सकता है। 60 साल की उम्र के बाद पीपीएफ में निवेश कर सकते हैं लेकिन एनपीएस में नहीं।

निवेश का तरीका (Process of Investment)

दोनों ही Schemes में investment के लिए एक bank account open करना जरूरी है। Hindu Undivided Family (HUF) समेत केवल भारतीय ही PPF account खोल सकते हैं। NRI PPF account open नहीं कर सकते, जबकि हर भारतीय नागरिक, भले ही वह NRI हो और उसने 18 साल की उम्र पूरी कर ली हो, NPS account खोल सकता है। HUF NPS account नहीं खोल सकते। Minors के नाम पर NPS account नहीं खोला जा सकता, Minors के नाम से parents या legal guardian PPF account खोल सकते हैं।  

अंशदान की सीमा व कर लाभ (Contribution limit and benefit)

PPF के मौजूदा rules के अनुसार आप इसमें सिर्फ एक लाख रुपये तक का ही contribute कर सकते हैं। आपको अनिवार्य रूप से साल भर में एक बार 500 रुपये का contribute करना ही होगा। एक साल में आप अधिकतम 12 बार इसमें पैसे जमा करा सकते हैं। tax benefit के लिए आप अपने निजी PPF account, अपने बच्चे या फिर अपने जीवनसाथी के account में contribute कर सकते हैं, जबकि NPS में आप अपने ही account में contribute कर सकते हैं। PPF पर tax benefit के section 80 C के तहत जबकि NPS में tax benefit section 80 CCD-1 के तहत मिलते हैं।

एक लाख रुपये की overall limit में NPS contribution अगर आप self employed हैं तो आपकी gross total income का 10% से ज्यादा न हो और अगर आप salaried हैं तो आपके वेतन के 10% से ज्यादा न हो। NPS में आप इससे ज्यादा पैसे भी जमा करवा सकते हैं लेकिन tax benefit उपरोक्त रकम तक ही मिलेगा, यानी कि NPS में contribute करने की आजादी है जो कि एक लाख रुपये की सीमा वाले PPF में नहीं हैं।

अगर आपका employer आपके NPS account में आपके salary का 10% तक contribute करता है तो section 80 CCE के तहत एक लाख रुपये की सीमा लागू नहीं होगी। अगर आप higher tax bracket में आते हैं तो इस सुविधा की बदौलत आप good retirement fund create कर सकते हैं।

परिपक्वता रकम पर कर (Tax on maturity)

मौजूदा tax rules के अनुसार PPF account से maturity पर मिलने वाली पूरी रकम tax free है पर NPS Tier-1 accounts में 60 साल की उम्र में पहुंचने के बाद आपको जमा रकम के 40% हिस्से से भारत में registered किसी भी Life Insurance company से Annuity, जो कि फिलहाल taxable है और प्रस्तावित DTC (Direct Tax Code) में भी taxable है, खरीदना अनिवार्य है। बाकी की 60% रकम पूरी तरह से tax free होती है।

खातों की फ्लेक्सिबिलिटी (Accounts Flexibility)

PPF accounts की शुरुआती अवधि 15 साल निश्चित है और जिस साल खाता 15 साल पूरा करे, उसके 31 मार्च को यह mature हो जाता है, उसके बाद भी आप इसे एक बार में 5 साल के लिए आगे बढ़ा सकते हैं और योगदान जारी रख सकते हैं लेकिन 60 साल पूरा करने के बाद आप NPS में contribute नहीं कर सकते।

रिटर्न की दर (Rate of Return)



PPF में rate of return government द्वारा तय की जाती है, फिलहाल यह 8.8% है। जबकि NPS के rate of return आपके द्वारा selected debt and equity funds के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। पर ध्यान रहे कि इसमें कम समय में भले ही कम return मिले पर long duration में इसका return PPF से ज्यादा भी हो सकता है। पर इसमें risk की संभावना भी है। जो investors जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं, उनके लिए PPF ही बढ़िया है।

डायरेक्ट टैक्स कोड के बाद हालात (Situation after Direct Tax Code implementation)

Parliament में पेश DTC (Direct Tax Code implementation) के अनुसार NPS और PPF दोनों investment के ऐसे विकल्पों में शामिल हैं जिन पर income tax benefit प्रस्तावित है। NPS में employers के contribution की बात है तो उसे पहले salary माना जाएगा और उस salary से 10% deduction की अनुमति दी जाएगी। इसका मतलब हुआ कि DTC के लागू होने के बाद employers का contribution , salary से पूरा deductible रहेगा जैसे इस समय professional tax के लिए deduction मिलता है। DTC के तहत आपको जीवनसाथी व बच्चे के लिए NPS में एक लाख रुपये तक के अंशदानं पर benefit मिलेगी।

दोस्तों, हमारी पूरी कोशिश रही है की हम आपको PPF और NPS से related सही जानकारी दें, लेकिन यदि हमसे कोई गलती हो गयी हो तो हमें जरूर सूचित करें, हम आपके आभारी रहेंगे!

साभार : एक Gmail मित्र



मित्रों, अपने बहुमूल्य विचार हमें नीचे Comment के माध्यम से दें! धन्यवाद्! हमारे अन्य हजारों पाठकों की तरह, आप भी हमारे Free Email Newsletter का Subscription ले सकते हैं! यदि आप हमारे ब्लॉग पर दिए हुए जानकारी से संतुष्ट हैं तो आप हमें Facebook पर Like कर सकते हैं और Twitter पर Follow भी कर सकते हैं!

Share this:

Comments(8)

  1. August 1, 2013
  2. August 1, 2013
  3. August 1, 2013
  4. August 1, 2013
  5. August 5, 2013
  6. August 5, 2013
  7. July 18, 2016
  8. June 22, 2017

Leave a Reply to Amityadav Cancel reply