ईद का अर्थ – Eid and its meaning

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दोस्तों और मेरे आदरणीय पाठकों, आज के इस Post में हम ईद का अर्थ क्या है, यह जानेंगे! उससे पहले, आप सभी को अपनी कहानी की तरफ से ईद मुबारक!

दोस्तों, ईद अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है लौट कर आना। इस तरह ईद की खुशियां मनाने वाले अपने और पूरे मानव समाज के लिये यह कामना करते हैं कि खुशियों का यह दिन उनके लिए बार-बार लौट कर आए। ईद वास्तव में हमें सामूहिकता की भावना के साथ खुशियां मनाने का अवसर प्रदान करती है और तमाम इन्सानों के बीच भाईचारे की भावना का संचार करती है।


दुनिया भर के मुसलमानों में मनाया जाने वाला ईदुल फितर त्योहार पवित्र रमजान के महीने की समाप्ति पर आता है। रमजान के महीने में लोग रोजे रखते हैं। अल्लाह की इबादत करते हैं और भूखे रह कर कष्ट सहते हुए उन गरीबों के दुख का एहसास करते हैं, जिन्हें दो जून की रोटी भी नहीं मिलती। जबकि रोजों की समाप्ति पर रोजेदार ‘सदक-ए-फित्र’ के रूप में ऐसे गरीबों की न सिर्फ आर्थिक सहायता करते हैं, बल्कि पूरा समाज मिलकर ईद की खुशियां मनाता है।

इसके साथ ही ईद ईश्वर की तरफ से उन रोजेदारों के लिए एक तरह का ईनाम है जिन्होंने एक महीने तक रोजे रख कर उसके आदेश का पालन किया और यह साबित किया कि अल्लाह के हुक्म या आदेश पर वे भूख और प्यास के कष्ट सहने के लिए भी तैयार हैं। अल्लाह की तरफ से इनाम के रूप में दिये गये इस त्योहार अर्थात ईद पर नमाजे दोगाना अर्थात ईद की दो रकत नमाज अदा कर के हर मुसलमान वास्तव में अल्लाह का शुक्र अदा करता है कि उसने ईश्वर के आदेशों का पालन किया और अब इनाम के रूप में उसे अल्लाह ने ईद मनाने का अवसर दिया।

ईद के दिन की शुरुआत पुरुषों महिलाओं व बच्चों के स्नान व नए कपड़ों के पहनने से होती है। ईद के दिन नए कपड़े पहनने का विशेष धार्मिक महत्व भी है और इसे ‘सवाब’ माना गया है। तमाम पुरुष और बच्चे नमाज के लिए तैयार होकर ईदगाह जाते हैं।

ईद की नमाज विशेष रूप से किसी खुले स्थान पर शहर से दूर पढ़ने का भी महत्व है। इस तरह किसी एक शहर के तमाम वासियों को सामूहिकता के साथ इबादत करने के साथ-साथ एक-दूसरे से गले मिलने और खुशियां बांटने का अवसर मिल जाता है। ईद के दिन एक-दूसरे से गले मिलने और एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देने की भी ताकीद की गई है।

सामूहिकता की भावना को बनाए रखने के लिए यह भी कहा गया है कि ईद की नमाज पढ़ने के लिए जाने वाले व्यक्ति एक रास्ते से जाएं और दूसरे रास्ते से वापस आएं। इसका उद्देश्य यही है कि रास्ते में भी अधिक से अधिक लोगों से मिलकर ईद की खुशी बांटी जा सकें।

ईद के अवसर पर मुसलमान के लिए सदकएफित्र देना आवश्यक है। यह एक तरह का धार्मिक कर है, जो प्रति व्यक्ति उसके द्वारा खाये जाने वाले अनाज आदि की विशेष मात्र के मूल्य पर आधारित होता है। इसका उद्देश्य ईद के दिन ऐसे गरीबों की आर्थिक सहायता करना है जो आर्थिक तंगी के कारण ईद नहीं मना सकते। लेकिन सदकए फित्र की रकम व अन्य सहायता से वे भी ईद की खुशियों में शामिल हो जाते हैं। ईद का संदेश है कि ‘अल खलको अयातल्लाह’ अर्थात पूरी दुनिया अल्लाह का परिवार है।

ईद के दिन खाने के लिए भी विशेष व्यंजन तैयार किए जाते हैं। सिंवैय्यां ईद के विशेष व्यंजन में शामिल हैं, जिन्हें भारतीय उप महाद्वीप के विभिन्न भागों में क्षेत्रीय परम्पराओं और तरीकों के अनुसार अलग-अलग ढंग से तैयार किया जाता है। किवामी सिंवई, शीर, सिवय्यों का जर्दा आदि को आमतौर पर बहुत पसन्द किया जाता है। इसके अलावा भी हर परिवार, घर और क्षेत्र में लोगों की पसन्द के अनुसार विभिन्न मीठे और नमकीन व्यंजन तैयार किये जाते हैं।

इस दिन न केवल ईदगाह या रास्तों में लोग एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते हैं, बल्कि निकट संबंधी, पड़ोसी और अन्य धर्मो के लोग भी अपने मुसलमान भाइयों के घर जाकर उन्हें ईद की मुबारकबाद देते हैं। बच्चों के लिए यह दिन इस भी लिए विशेष प्रसन्नता का होता है कि नए कपड़ों के साथ-साथ उन्हें अपने बड़ों और बुजुर्गो से ‘ईदी’ के रूप में विशेष इनाम अर्थात नकद धनराशि प्राप्त होती है, जिसे ईद का पॉकेटमनी भी कहा जा सकता है।

भारत जैसे बहुरंगी सभ्यता वाले देश में ईद का विशेष महत्व है। तमाम धर्मो के लोग न केवल मुस्लिम भाइयों को ईद की मुबारकबाद देते हैं, बल्कि भारतीय साहित्य और फिल्मों तक में इस त्योहार के रंग नजर आते हैं।

साभार : एक Facebook मित्र

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