संस्कारों की पहली पाठशाला – First School for Kids is home

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मित्रों, एक व्यक्ति अपने दो पुत्रों को चिडियाघर ले गया। टिकट खिडकी पर प्रवेश टिकटों का मूल्य इस प्रकार लिखा था – छ: वर्ष से छोटे बच्चों को नि शुल्क प्रवेश। छ: वर्ष से बारह वर्ष तक के बच्चों के लिए पांच रुपए। अन्य, दस रुपए।

व्यक्ति ने टिकट बेचनेवाले को रुपए देते हुए कहा – छोटा लडका सात साल, बडा लडका तेरह साल और एक टिकट मेरा।


टिकट बेचनेवाले ने कहा – आप अजीब आदमी हैं! आप कम से कम दस रुपये बचा सकते थे। छोटे को छ: साल का बताते और बडे को बारह साल का। मुझे एक-एक साल का अंतर थोडे ही पता चलता। 

व्यक्ति ने कहा – आपको तो पता नहीं चलता, लेकिन बच्चों को तो उनकी उम्र पता है और मैं नहीं चाहता कि वे इस बुरी बात से सीख लें और यह एक कुरीति बन जाए!

महापुरुषों ने सच ही कहा है दोस्तों, की बच्चों के संस्कारों की पहली पाठशाला उनका घर ही होता है और इन्हें सिखाने वाले उनके माता पिता।

मित्रों अपने बहुमूल्य विचार हमें नीचे Comment के माध्यम से दें! धन्यवाद्!

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