अपनी आलोचना को स्वीकार करें – Accept your Criticism

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दोस्तों, ऐसा कहा गया है – निंदक नियरे राखिये आँगन कुटी छवाय अर्थात अपने आलोचक को अपने नजदीक रखिये ताकि आपको अपनी कमी का पता चल सके और आप जीवन में आगे बढ़ने के लिए उन कमियों को दूर कर सकें. लोग कभी कभी यह कहते हैं कि अमुक व्यक्ति मेरी गलत आलोचना कर रहा है. गलत आलोचना या तो अज्ञानता वश या ईर्ष्या के कारण होता है. जीवन में ऐसा होता रहता है. 


अज्ञानता – जब आलोचना अज्ञानतावश होती है तो आलोचक को सही जानकारी देकर आसानी से स्थिति में सुधार लाया जा सकता है

ईर्ष्या – जब ईर्ष्या के कारण आलोचना होती है तो उसे गुप्त तारीफ के रूप में स्वीकारें. आपकी आलोचना इसलिए हो रही है क्योंकि आलोचक खुद को आपकी जगह देखना चाहता है. लेकिन वह ऐसा न हो सकने की वजह से आपकी तारीफ के बजाय आलोचना करता है. आखिर जिस पेड़ पर सबसे ज्यादा फल लगे होते है पत्थर भी सबसे ज्यादा उसी पेड़ पर मारे जाते हैं

रचनात्मक आलोचना को स्वीकार करने की काबिलियत न होना कमजोर स्वाभिमान का लक्षण है. आलोचना को स्वीकार करने के कुछ सुझाव इस प्रकार हैं –

  • आलोचना को सही ढंग से लें. इसे बड़प्पन के साथ स्वीकार करें न कि मनमुटाव के साथ
  • आलोचनाओं से सीख लें
  • खुले मन से आलोचना को स्वीकारें, परखें और अगर ठीक लगे तो इस पर अमल करें
  • उस व्यक्ति के प्रति हमेशा शुक्रगुजार हों जो आपकी रचनात्मक आलोचना करता है क्योंकि वह आपका शुभचिंतक है और आपकी सहायता करना चाहता है
  • ऊँचे स्वाभिमान वाला व्यक्ति रचनात्मक और सकारात्मक आलोचना स्वीकार कर बेहतर बनता है न कि ख़राब
साभार – एक फेसबुक मित्र
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