भगवान की शिक्षा – Teaching by God

Share this:
Picture Source

एक नगर में रहने वाले एक पंडित जी की ख्याति बहुत दूर दूर तक फैली हुई थी! पास ही के गाँव मे स्थित मंदिर के पुजारी जी के आकस्मिक निधन होने की वजह से उन्हें ही वहाँ का पुजारी नियुक्त किया गया था !

एक बार वह अपने गंतव्य की और जाने के लिए बस मे चढ़े! उन्होंने कंडक्टर को किराए के रुपये दिए और अपनी सीट पर जाकर बैठ गए!

कंडक्टर ने जब किराया काटकर रुपये उन्हें वापस दिए तो पंडित जी ने पाया की कंडक्टर ने दस रुपये ज्यादा उन्हें दे दिए हैं!


पंडित जी ने सोचा कि थोड़ी देर बाद कंडक्टर को बाकि के ज्यादा रुपये वापस कर दूँगा!

फिर, कुछ देर बाद उनके मन मे विचार आया की बेवजह दस रुपये जैसी मामूली सी रकम को लेकर वह  परेशान हो रहे हैं, आखिर ये बस कंपनी वाले भी तो लाखों रुपये हर महीने कमाते हैं, बेहतर है इन रुपयों को भगवान की भेंट समझकर अपने पास ही रख लिया जाए, वह इनका सदुपयोग ही तो करेंगे!

मन मे चल रहे विचार के बीच उनका गंतव्य स्थल आ गया लेकिन बस मे उतरते ही उनके कदम अचानक ठिठके ! उन्होंने जेब मे हाथ डाला और दस का नोट निकाल कर कंडक्टर को देते हुए कहा-  भाई तुमने मुझे किराए के रुपये काटने के बाद भी दस रुपये ज्यादा दे दिए थे! इसे रख लो!

कंडक्टर मुस्कराते हुए बोला – क्या आप ही गाँव के मंदिर के नए पुजारी हो?

पंडित जी के हामी भरने पर कंडक्टर बोला – मेरे मन मे कई दिनों से आपके प्रवचन सुनने की इच्छा थी, आपको अपने बस मे देखा तो ख्याल आया कि, चलो देखते है कि मैं ज्यादा पैसे लौटाऊँ तो आप क्या करते हैं? अब मुझे पता चल गया की आपके प्रवचन जैसा ही आपका आचरण है जिससे सभी को सीख लेनी चाहिए! धन्यवाद!

ये बोलकर कंडक्टर ने गाड़ी आगे बड़ा दी!

पंडित जी बस से उतरकर पसीना पसीना थे , उन्होंने दोनों हाथ जोड़कर भगवान से कहा – हे प्रभु, तेरा लाख लाख शुक्र है जो तूने मुझे बचा लिया वरना मैंने तो दस रुपये के लालच मे तेरी शिक्षाओं की बोली लगा दी थी पर तूने सही समय पर मुझे थाम लिया….!

Share this:

Leave a Reply