सांई बाबा की शिक्षा – Sai Baba Learnings

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साईं बाबा (28 सितंबर, 1835– 15 अक्तूबर, 1918), एक महान भारतीय संत एवं धार्मिक गुरू हैं जिनका जीवन महाराष्ट्र के शिरडी में बीता। उन्होंने जीवनपर्यंत लोक कल्याणकारी कार्यों को किया तथा जनता में भक्ति एवं धर्म की धारा बहाई। इनके अनुयायी भारत के सभी प्रांतों में और विश्वभर में भी हैं और यही वजह है की  इनकी मृत्यु के करीब 95 वर्षों के बाद आज भी इनके चमत्कारों को सुना जाता है।

सांई बाबा की शिक्षा:

1. सबका मालिक एक – साई बाबा की सबसे बडी शिक्षा और सन्देश है कि जाति, धर्म्, समुदाय, आदि व्यर्थ की बातो मे ना पड कर आपसी मतभेद भुलाकर आपस मे प्रेम और सदभावाना से रहना चाहिए क्योकि सबका मलिक एक है ।

2. श्रद्धा और सबूरी – साई बाबा ने अपने जीवन मे यह सन्देश दिया है कि हमेशा श्रद्धा और विश्वास के साथ जीवन यापन करते हुए सबूरी यानी की सब्र के साथ जीवन व्यतीत करे !

3. मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है – साई बाबा ने कभी भी किसी को धर्म की अवहेलना नहीं की अपितु सभी धर्मों का सम्मान करने की सलाह देते हुए हमेशा मानवता को ही सबसे बडा धर्म और कर्म बताते हुए जीवन जीने की अमूल्य शिक्षा प्रदान की है!

4. जातिगत भेद भुला कर प्रेम पूर्वक रहना – साई बाबा ने कहा है की जाति,समाज,भेद-भाव,आदि सब बातें ईश्वर ने नही बल्कि इंसानों द्वारा रची गयी कहानियाँ है! इसलिए ईश्वर की नजर में न तो कोई उच्च है और न ही कोई निम्न इसलिए जो काम ईश्वर को भी पसद नहीं है वह मनुष्य को तो करना ही नहीं चाहिए अर्थात जात-पात,धर्म,समाज आदि मिथ्या बातों में न पड़ कर आपस मे प्रेमपूर्वक रहकर जीवन व्यतीत करना चाहिए!

5. गरीबो और लाचार की मदद करना सबसे बड़ी पूजा है – साई बाबा ने हमेसा ही सभी जनमानस से यही बार-बार कहा है कि सभी के साथ ही समानता का व्यवहार करना चाहिए! गरीबों और लाचारों की यथासम्भव मदद करना चाहिए और यही सबसे बडी पूजा है! क्योकि जो गरीबों, लाचारों की मदद करता है ईश्वर उसकी मदद करता है!

6. माता-पिता, बुजुर्गो, गुरुजनों और बड़ों सदैव का सम्मान करना चाहिए!

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