मीरा के प्रभु,गिरधर गोपाल – Mira Bai Krishna Devotee

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महान संत मीरा बाई अपने कुछ भक्तों के साथ हरि नाम संकीर्तन करते हुए अपने परम पूज्य कान्हा के धाम वृंदावन जा रही थीं।
रास्ते में एक दिन संध्या हो चली था , उनके एक भक्त ने कहा – “ माँ, अब हमें आगे नहीं जाना चाहिए, हमारे साथ भक्त की टोली में अनेक बच्चे और स्त्री साधक हैं , आगे बहुत ही घना जंगल है , हम आसपास यहीं कहीं रात व्यतीत कर लेते हैं”

संत मीरा बाई ने भी हामी भर दी और कहा की पूरी टोली के लिए कोई रहने का ठिकाना देखो|

एक भक्त ने कहा – “ माँ, कुछ ही दूरी पर एक संत का बड़ा सा आश्रम है, हम सब वहीं रुक जायेंगे”

माँ ने हामी भर दी| पूरी टोली उस संत के आश्रम पहुंची| आश्रम का एक सेवक द्वार पर पहरे के लिए खड़ा था|
माँ मीराबाई ने कहा – “ क्या मुझे और मेरी भक्त की टोली को आज के रात्रि निवास के लिए यहाँ कोई स्थान मिलेगा ?”
सेवक ने कहा – “ आप रुकें, मैं स्वामीजी से पूछ कर बताता हूँ”

सेवक अपने संत स्वामी जी से मिलने के पश्चात आकर बोला – “ मुझे क्षमा करें, स्वामी जी ने कहा है इस आश्रम में मात्र पुरुष ही रुक सकते हैं क्यूंकि यहाँ सब ब्रह्मचारी रहते हैं”

मीरा बाई ने भोज पत्र पर कुछ लिखकर उस सेवक को पकड़ा दिया और कहा – “ धन्यवाद्, मेरा एक काम करें , ये पत्र कृपया अपने स्वामीजी को देकर आयें”

स्वामीजी ने जैसे ही उस पंक्ति को पढ़ा वे दौड़ कर आए और मीरबाई के चरणों में गिर पड़े और कहा – “ माँ, हमें क्षमा करना, हम आपको पहचान नहीं पाये, आपका मेरे आश्रम में सदैव स्वागत है”

“ दोस्तों, माँ मीराबाई ने जो एक पंक्ति लिखकर स्वामी जी को भेजी थी वह इस प्रकार थी”

” मुझे लगा था कि इस संसार में एक ही पुरुष है- श्री कृष्ण और शेष सभी नारी ,आज पता चला कि दो पुरुष हैं “

“जय श्री कृष्ण”|

जय जय श्री राधे-श्याम


साभार : एक Facebook मित्र
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