नाथूराम गोडसे का अंतिम बयान – The Last Statement of Nathuram Godse

Share this:

नाथूराम गोडसे का अंतिम बयान


दोस्तों, हमारे एक फेसबुक मित्र ने नाथूराम गोडसे का अंतिम बयान हमारे साथ शेयर किया है, कहा जाता है की इसे सुनकर अदालत में उपस्थित सभी लोगो की आँखे गीली हो गई थी और कई तो रोने लगे थे। एक जज महोदय ने अपनी टिपणी में लिखा था की यदि उस समय अदालत में उपस्थित  लोगो को जूरी बना  जाता और उनसे फेसला देने को कहा जाता तो निसंदेह वे प्रचंड बहुमत से नाथूराम के निर्दोष होने का निर्देश देते!

नाथूराम जी ने अपने बयान में कहा था – ” सम्मान ,कर्तव्य और अपने देश वासियों के प्रति प्यार कभी कभी हमें अहिंसा के सिद्धांत से हटने के लिए बाध्य कर देता है . में कभी यह नहीं मान सकता की किसी आक्रामक का सशस्त्र  प्रतिरोध करना कभी गलत या अन्याय पूर्ण भी हो सकता है .

प्रतिरोध करने और यदि संभव हो तो ऐसे शत्रु को बलपूर्वक वश में करना को मैं एक धार्मिक और नैतिक कर्तव्य मानता हूँ . मुसलमान अपनी मनमानी कर रहे थे, या तो कांग्रेस उनकी इच्छा के सामने आत्मसर्पण कर दे और उनकी सनक ,मनमानी और आदिम रवैये के स्वर में स्वर मिलाये अथवा उनके बिना काम चलाये .वे अकेले ही प्रत्येक वस्तु और व्यक्ति के निर्णायक थे।

महात्मा गाँधी अपने लिए जूरी और जज दोनों थे .गाँधी जी ने मुस्लिमों को खुश करने के लिए हिंदी भाषा के सौंदर्य और सुन्दरता के साथ बलात्कार किया। गाँधी जी के सारे प्रयोग केवल और केवल हिन्दुओ
की कीमत पर किये जाते थे। जो कांग्रेस अपनी देश भक्ति और समाज वाद का दंभ भरा करती थी . उसी ने गुप्त रूप से बन्दुक की नोक पर पाकिस्तान को स्वीकार कर लिया और जिन्ना के सामने नीचता से
आत्मसमर्पण कर दिया।

मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के कारण भारत माता के टुकड़े कर दिए गय और 15 अगस्त 1947 के बाद देश का एक तिहाई भाग हमारे लिए ही विदेशी भूमि बन गई। नेहरु तथा उनकी भीड़ की स्वीकारोक्ति के साथ ही एक धर्म के आधार पर अलग राज्य बना दिया गया .इसी को वे बलिदानों द्वारा जीती गई स्वतंत्रता कहते है। और, किसका बलिदान ? 

जब कांग्रेस के शीर्ष नेताओ ने गाँधी जी के सहमती से इस देश को काट डाला ,जिसे हम पूजा की वस्तु मानते है , तो मेरा मस्तिष्क भयंकर क्रोध से भर गया .मैं साहस पूर्वक कहता हूँ की गाँधी अपने कर्तव्य में असफल हो गए। उन्होंने स्वयं को पाकिस्तान का पिता होना सिद्ध किया।

मैं कहता हूँ की मेरी गोलियां एक ऐसे व्यक्ति पर चलाई गई थी ,जिसकी नीतियों और कार्यो से करोड़ों हिन्दुओं को केवल बर्बादी और विनाश ही मिला। ऐसी कोई क़ानूनी प्रक्रिया नहीं थी जिसके द्वारा उस अपराधी को सजा दिलाई जा सके, इसीलिए मैंने इस घातक रास्ते का अनुसरण किया।

मैं अपने लिए माफ़ी की गुजारिश नहीं करूँगा ,जो मैंने किया उस पर मुझे गर्व है . मुझे कोई संदेह नहीं है की इतिहास के इमानदार लेखक मेरे कार्य का वजन तोल कर भविष्य में किसी दिन इसका सही मूल्यांकन करेंगे। जब तक सिन्धु नदी भारत के ध्वज के नीचे से ना बहे तब तक मेरी अस्थियो का विसर्जन मत करना।

नोट – अपनी कहानी ने इस बयान की सत्यता की जांच नहीं की है, अगर किसी मित्र को इसमें कुछ आपत्तिजनक लगे तो हमें बताएं।

For Discounted Online Shopping on Flipkart Click Here!

हिंदी में कहानियों के संग्रह पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

बच्चों की कहानियाँ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

ऑनलाइन शॉपिंग डिस्काउंट के लिए यहां क्लिक करें। 

Share this:

Comments(107)

  1. June 17, 2013
    • January 26, 2016
      • April 15, 2016
        • August 12, 2016
      • August 25, 2016
      • September 16, 2016
      • October 4, 2016
      • October 27, 2016
      • January 25, 2017
      • February 2, 2017
      • May 23, 2017
      • September 23, 2017
    • August 14, 2016
      • October 2, 2016
      • March 25, 2017
      • August 21, 2017
    • August 15, 2016
    • September 28, 2016
    • October 2, 2016
      • December 14, 2016
      • February 19, 2017
      • June 16, 2017
      • July 28, 2017
      • September 1, 2017
    • October 20, 2016
    • October 29, 2016
      • January 6, 2017
        • May 31, 2017
        • August 12, 2017
    • November 20, 2016
    • December 27, 2016
    • December 30, 2016
    • January 6, 2017
    • January 26, 2017
    • February 2, 2017
    • February 2, 2017
    • February 20, 2017
    • March 25, 2017
    • April 29, 2017
    • June 25, 2017
  2. August 27, 2013
  3. October 2, 2013
    • August 8, 2016
    • August 12, 2016
    • October 6, 2016
  4. December 26, 2013
  5. April 11, 2014
  6. April 24, 2014
  7. May 31, 2014
  8. October 2, 2014
    • August 16, 2016
  9. October 5, 2014
  10. October 31, 2014
  11. January 29, 2016
    • August 16, 2016
  12. April 30, 2016
  13. May 27, 2016
  14. July 11, 2016
    • August 12, 2016
    • August 15, 2016
  15. July 15, 2016
    • November 24, 2016
  16. July 20, 2016
  17. August 14, 2016
  18. August 24, 2016
    • August 2, 2017
  19. October 2, 2016
  20. October 3, 2016
  21. October 28, 2016
    • January 4, 2017
      • January 4, 2017
        • February 24, 2017
  22. October 31, 2016
  23. November 11, 2016
    • November 26, 2016
  24. November 24, 2016
    • November 26, 2016
    • December 20, 2016
  25. November 27, 2016
  26. December 3, 2016
    • December 20, 2016
    • December 20, 2016
      • January 2, 2017
  27. December 7, 2016
    • December 20, 2016
  28. December 13, 2016
  29. December 20, 2016
  30. December 20, 2016
  31. December 23, 2016
    • February 16, 2017
  32. December 30, 2016
  33. January 2, 2017
    • January 14, 2017
  34. January 18, 2017
  35. January 25, 2017
  36. January 26, 2017
  37. January 28, 2017
  38. February 16, 2017
  39. March 9, 2017
  40. April 19, 2017
  41. May 20, 2017
  42. May 20, 2017
  43. May 21, 2017
  44. July 28, 2017
  45. September 17, 2017

Leave a Reply to Lokhande Cancel reply