महापुरुषों के अनमोल विचार – Hindi Quotes By Great People

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1. यदि मार्ग काँटों भरा हो, और आप नंगे पांव हो तो रास्ता बदल लेना चाहिए – चाणक्य
2. वाणी के बजाय कार्य से दिए गए उदाहरण कहीं ज्यादा प्रभावी होते हैं -अज्ञात
3. मनुष्य का पतन कार्य की अधिकता से नहीं वरन कार्य की अनियमितता से होता है- अज्ञात
4. कायर आदमी अपनी मौत से पहले न जाने कितनी बार मरता है- अज्ञात
5. जो सभी का मित्र होता है वो किसी का मित्र नहीं होता – ओशो
6. क्रोध में मनुष्य अपने मन की बात कहने के बजाय दूसरों के ह्रदय को ज्यादा दुखाता है। -प्रेमचंद

7. सारा हिन्दुस्तान गुलामी में घिरा हुआ नहीं है। जिन्होंने पश्चिमी शिक्षा पाई है और जो उसके पाश में फँस गए हैं, वे ही गुलामी में घिरे हुए हैं – महात्मा गाँधी
8. मानव जीवन धूल की तरह होता है, हम इसे रो-धोकर  इसे कीचड़ बना देते हैं -बकुल वैद्य
9. सौंदर्य और विलास के आवरण में महत्त्वाकांक्षा उसी प्रकार पोषित होती है जैसे म्यान में तलवार – रामकुमार वर्मा
10. जिस प्रकार बिना जल के धान नहीं उगता उसी प्रकार बिना विनय के प्राप्त की गई विद्या फलदायी नहीं होती – भगवान महावी
11. अकर्मण्यता के जीवन से यशस्वी जीवन और यशस्वी मृत्यु श्रेष्ठ होती है -चंद्रशेखर वेंकट रमण
12. सत्य से कीर्ति प्राप्त की जाती है और सहयोग से मित्र बनाए जाते हैं -कौटिल्य अर्थशास्त्र
13. जिस प्रकार जल कमल के पत्ते पर नहीं ठहरता है, उसी प्रकार मुक्त आत्मा के कर्म उससे नहीं चिपकते हैं -छांदोग्य उपनिषद
14. कामनाएँ समुद्र की भाँति अतृप्त हैं। पूर्ति का प्रयास करने पर उनका कोलाहल और बढ़ता है -स्वामी विवेकानंद
15. जैसे सूर्य आकाश में छुप कर नहीं विचर सकता उसी प्रकार महापुरुष भी संसार में गुप्त नहीं रह सकते -व्यास
16. पुरुषार्थ से दरिद्रता का नाश होता है, जप से पाप दूर होता है, मौन से कलह की उत्पत्ति नहीं होती और सजगता से भय नहीं होता – चाणक्य
17. शासन के समर्थक को जनता पसंद नहीं करती और जनता के पक्षपाती को शासन। इन दोनो का प्रिय कार्यकर्ता दुर्लभ है- पंचतंत्र
18. ख्याति नदी की भाँति अपने उद्गम स्थल पर क्षीण ही रहती है किंदु दूर जाकर विस्तृत हो जाती है -भवभूति
19. कुमंत्रणा से राजा का, कुसंगति से साधु का, अत्यधिक दुलार से पुत्र का और अविद्या से ब्राह्मण का नाश होता है – विदुर
20. सारा जगत स्वतंत्रता के लिए लालायित रहता है फिर भी प्रत्येक जीव अपने बंधनो को प्यार करता है- श्री अरविंद
21. बुद्धि के सिवाय विचार प्रचार का कोई दूसरा शस्त्र नहीं है, क्योंकि ज्ञान ही अन्याय को मिटा सकता है- शंकराचार्य
22. खुद के लिये जीनेवाले की ओर कोई ध्यान नहीं देता पर जब आप दूसरों के लिये जीना सीख लेते हैं तो वे आपके लिये जीते हैं – श्री परमहंस योगानंद
23. बच्चों को पालना, उन्हें अच्छे व्यवहार की शिक्षा देना भी सेवाकार्य है, क्योंकि यह उनका जीवन सुखी बनाता है -स्वामी राम सुखदास
24. खुशियों को दामन में भरने पर वह थोड़ी सी लगती हैं, लेकिन यदि उन्हें बांटा जाये तो वे और ज्यादा बड़ी नजर आती हैं -अज्ञात
25. उठो जागो और लक्ष्य तक मत रुको -स्वामी विवेकानंद
26. सत्य से बड़ा तो इश्वर भी नहीं – महात्मा गाँधी
27. दो की दोस्ती में एक का धर्य जरुरी है -अज्ञात
28. किसी को माफ़ करना कमजोरी नहीं वरन सामर्थ्यवान ही ऐसा कर सकता है -महात्मा गाँधी
29. मेहनत करने से दरिद्रता नहीं रहती, धर्म करने से पाप नहीं रहता, मौन रहने से कलह नहीं होता – चाणक्य
30. क्रोध ऐसी आँधी है जो विवेक को नष्ट कर देती है – अज्ञात
31. मुठ्ठी भर संकल्पवान लोग जिनकी अपने लक्ष्य में दृढ़ आस्था है, इतिहास की धारा को बदल सकते हैं – महात्मा गांधी
32. हज़ार योद्धाओं पर विजय पाना आसान है, लेकिन जो अपने ऊपर विजय पाता है वही सच्चा विजयी है – गौतम बुद्ध
33. मन एक भीरु शत्रु है जो सदैव पीठ के पीछे से वार करता है – प्रेमचंद
34. अपने को संकट में डाल कर कार्य संपन्न करने वालों की विजय होती है, कायरों की नहीं – जवाहरलाल नेहरू
35. विश्वास वह पक्षी है जो प्रभात के पूर्व अंधकार में ही प्रकाश का अनुभव करता है और गाने लगता है – रवींद्रनाथ ठाकुर
36. ऐसे देश को छोड़ देना चाहिए जहाँ धन तो है लेकिन सम्मान नहीं -विनोबा भावे
37. अच्छे शब्दों के प्रयोग से बुरे लोगों का भी दिल जीता जा सकता है- भगवान बुद्ध
38. मनुष्य का सबसे बड़ा यदि कोई शत्रु है तो वह है उसका अज्ञान – चाणक्य

इच्छाएं ही सब दुखों का मूल कारण है – भगवान बुद्ध
39. ब्रह्माज्ञानी को स्वर्ग तृण है, शूर को जीवन तृण है, जिसने इंद्रियों को वश में किया उसको स्त्री तृण-तुल्य जान पड़ती है, निस्पृह को जगत तृण है -चाणक्य
40. सबसे उत्तम तीर्थ अपना मन है जो विशेष रूप से शुद्ध किया हुआ हो -स्वामी शंकराचार्य
41. कर्म, ज्ञान और भक्ति का संगम ही जीवन का तीर्थ राज है -दीनानाथ दिनेश
42. तपस्या धर्म का पहला और आखिरी कदम है -महात्मा गांधी
43. अपनी पीड़ा सह लेना और दूसरे जीवों को पीड़ा न पहुंचाना, यही तपस्या का स्वरूप है -संत तिरुवल्लुवर
44. सत्याग्रह बल से नहीं ,हिंशा के त्याग से होता है -महात्मा गाँधी
45. लोग चाहे मुट्ठी भर हों,  लेकिन संकल्पवान हों, अपने लक्ष्य में दृढ आस्था हो, वे इतिहास को भी बदल सकते हैं -महात्मा गाँधी

46. हर आदमी कहता है की मैं अच्छा हूँ, लेकिन लोग क्या मानते हैं यह महत्वपूर्ण है – अज्ञात

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