जीवन के 10 सूत्र – 10 Principles for Life

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10 rules of life in hindiदोस्तों, आज की इस भागदौड़ की जिंदगी में बहुत जरूरी है अपने मन और शरीर के लिए समय निकालना। 

इसीलिए हमें जीवन के 10 सूत्र जो की बहुत ही आवश्यक हैं, अपनाना चाहिए, और जिससे जीवन अनुशासनबद्ध हो सके।

1. यम – यम के मुख्यतः पाँच प्रकार हैं – 1. अहिंसा 2. सत्य 3. अस्तेय 4. ब्रह्मचर्य और 5. अपरिग्रह। 


अपरिग्रह का सामान्य अर्थ है किसी वस्तु या विचार का संग्रह न करना और अस्तेय का अर्थ है ‍किसी वस्तु या विचार की चोरी ना करना। उपरोक्त पाँच सूत्रों में से आप जिस भी एक को साधना चाहें साध लें क्यूंकि ये सूत्र आपके शरीर और मन की गाँठों को खोल देगा।

2. नियम– नियम भी मुख्यतः पाँच होते हैं – 1.शौच 2.संतोष 3. तप 4. स्वाध्याय और 5. ईश्वर प्राणिधान।

शौच का अर्थ है शरीर और मन को साफ-सुथरा रखना। स्वाध्याय का अर्थ है स्वयं के विचारों का अध्ययन करना और ईश्वर प्रणिधान का अर्थ है कि सिर्फ ‘एक परमेश्वर’ के प्रति समर्पण करना। नियम से ही जिंदगी में अनुशासन आता है।

3. आसन– आसन तो वैसे इस जगत में बहुत से सुझाये गए हैं , लेकिन सूर्य नमस्कार ही ऐसा आसन है जिसके करते रहने से शरीर स्वस्थ्‍य बना रह सकता है।

4. अंग संचालन– यदि आप आसन ना भी करना चाहें तो अंग संचालनको अपने जीवन का हिस्सा बनाएँ, यानि आप अपने शरीर को हमेशा क्रियान्वान रखें।

5. प्रणायाम – प्राणायाम हमारे शरीर और मन दोनों को प्रभावित करता है, तो इसे शुरू करें अनुलोम विलोम से और उसे जारी रखें।

6. ध्यान – ध्यान रखें की ध्यान करने से पहले ये समझना जरूरी है कि ध्यान क्या होता है और इसका शाब्दिक अर्थ क्या है। ध्यान Meditation नहीं, Awareness है। ध्यान शरीर और मन का एक हो कर मौन हो जाना है। नियमित रूप से सिर्फ 10 मिनट का ध्यान आपके जीवन को अच्छे अर्थों में बदल सकता है।

7. मुद्राएँ– यहाँ हम बात सिर्फ हस्त मुद्राओं की कर रहे हैं। मुख्यत: पचास-साठ मुद्राएँ होती है। उनमें भी कुछ बेहद ही खास हैं जैसे की ज्ञान मुद्रा, पृथवि मुद्रा, वरुण मुद्रा, वायु मुद्रा, शून्य मुद्रा, सूर्य मुद्रा, प्राण मुद्रा, लिंग मुद्रा, अपान मुद्रा, अपान वायु मुद्रा, प्रणव मुद्रा, प्रणाम मुद्रा और अंजलीमुद्रा। उल्लेखित मुद्राएँ सभी रोगों में लाभदायक है। लेकिन इन साडी मुद्राओं का प्रयोग किसी उचित शिक्षक के संपर्क में रह कर ही करना चाहिए!

8. क्रियाएँ – क्रियाएँ करना आम जीवन में सभी के लिए मुश्किल होता है। मुख्य क्रियाएँ हैं- नेती, धौति, बस्ती, कुंजर, न्यौली तथा त्राटक। हम फिर से कहेंगे की उक्त क्रियाएँ किसी योग्य प्रशिक्षक से सीखकर ही करना चाहिए!

9. आहार– आहार तो बिना कहे हम सभी जानते हैं की यह बहुत जरूरी है अन्यथा आप और हम कितने ही आसन प्राणायाम, क्रियाएं और मुद्राएं करते रहें, वे असफल ही होंगी। ये बहुत ज़रूरी है की आप उचित आहार का चयान करें और निश्चित समय पर खाएँ। आहार में शरीर के लिए उचित पोषक तत्व होना जरूरी है। ना तो आप कम खाएँ और ना ज्यादा, मसालेदार खाना तो बिल्कुल ही वर्जित है।

10. विहार– विहार यानि घूमना फिरना करना बौद्ध काल में काफी प्रचलित था। कोशिश करें की अपने दिनचर्या में से थोडा समय निकलकर खुली हवा में पैदल भी चला करें। योग और आयुर्वेद में ये कहा गया है कि पैर यदि ज्यादा देर तक ढँके या बंधे हैं तो इसका कुअसर हमारी श्वास प्रणाली पर होता है।

तो दोस्तों, ये हैं जीवन के 10 सूत्र। आप यदि प्रत्येक सूत्र में से एक उपसूत्र का ही चयन करें और उसे जीवनपर्यन्त पालन करें, तो भी 10 सूत्र होते हैं जो बहुत ही लाभदायक सिद्ध होंगे। धन्यवाद!

अपने बहुमूल्य विचार हमें नीचे Comment के माध्यम से हम तक पहुंचाएं! धन्यवाद!

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