व्यंग्य – मेमसाब और काम वाली बाई – Mam & Bai

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एक दिन मेमसाब बोलीं काम वाली बाई से – ” अपने लड़के पर ध्यान क्यों नहीं देती? देखा ,कैसा मरियल सा है ! थोडा खिलाया पिलाया कर तो पढाई में भी मन लगेगा! नहीं तो तेरे जैसे ही घर घर काम करता घूमेगा!”  

बाई ने तसल्ली से मेमसाब को देखा , झाड़ू नीचे पटकी , पल्ला कमर में खोंसा ,गला साफ़ किया और बोली – “ऐसा है मैडम जी कि आपके मोटे कद्दू जैसे लड़के से मेरा लड़का लाख गुना अच्छा है! कभी देखा है अपने लड़के को ध्यान से …एक सूंड लटका दोगी तो पूरे गणेशजी में झांकी में बिठाने के काम आएगा!! मेरे लड़के से जरा रेस लगवा लो अपने लाल की …दस कदम भी दौड़ ले तो धन्य मानना खुद को! और हाँ
…येजो आपका छोकरा दिन भर कुरकुरे और बर्गर खाता वीडियोगेम में घुसा रहता है न तब मेरा छोरा गिल्ली डंडा और कबड्डी खेलता है! और एक बात और सुन लो …मुझे पता है इतने मंहगे स्कूल में पढ़ाने और चार चार ट्यूशन लगाने पर भी आपके छोरे की सेकण्ड डिविज़न आई है …और मेरा छोरा अपनी क्लास में फर्स्ट आया है! और कुछ कहना है या मैं झाड़ू लगा लूं …? 
मेमसाब का पसीना छूट पड़ा ..मेमसाब को काटो तो खून नहीं …मेमसाब थूक गटकने लगीं …मेमसाब कभी अपने थोक के भाव बेटे को देखतीं ,कभी बाई के मरियल लड़के को!

बाई झाड़ू लगाकर जाते जाते बोली ..” फ़ालतू में मेरे मुंह मत लगना अब !” 

तभी एफ एम पर गाना बजा ” छोडो भी ये गुस्सा ज़रा हंस के दिखाओ …दादी अम्मा दादी जाओ ..”

मेमसाब ने गुस्से में रेडियो का टेंटुआ मरोड़ा ,एक नज़र पिज़्ज़ा खाते अपने जिगर के टुकड़े पर डाली …बिना कारण एक झापड़ रसीद किया और आँखों में आंसू भर कर ” ये रिश्ता क्या कहलाता कहलाता है  ” देखने लगीं!

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