प्रेरक प्रसंग वीर शिवाजी – Inspirational Story of Veer Shivaji

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1. जब शिवाजी ने कल्याण दुर्ग पर विजय प्राप्त की और उनके सेनापति आवाजी सोनदेव ने कल्याण के परास्त मुस्लिम सूबेदार की अति सुन्दरी पुत्रवधू गौहर बानू को बंदी बनाकर उनकी सेवा में प्रस्तुत किया क्योंकि तत्कालीन परंपरा के अनुसार विजेता का अधिकार विजित की महिलाओं पर होता था. .गौहर बानू अप्रतिम सुन्दरी थी शिवा जी ने अपनी व अपने सूबेदार सोनदेव की ओर से उनसे क्षमा माँगी और कहा की, काश मेरी माँ भी आपकी तरह सुन्दर होती तो मैं भी इतना ही सुन्दर होता.उन्होंने उनको मुक्त कराकर ससम्मान उनके परिवार के पास भेज दिया.

2. सुलतान ने शिवाजी का वध करने के लिए अपने सिपहसालार अफज़ल खान को भेजा .ये सुलतान की धूर्तता पूर्ण कूटनीतिक चाल थी.शिवाजी प्रताप गढ़ में थे.अफज़ल
खान रास्ते में लूटपाट करता हुआ प्रतापगढ़ पहुंचा शिवा जी का खून तो खौला परन्तु वह जानते थे कि उनकी सैन्य क्षमता सीमित हैअतः उन्होंने कूटनीति का परिचय दिया और मौन साधे रखा.अफज़ल खान ही उनके पिता को बंदी बनाये जाने तथा शिवाजी के भाई संभाजी की मौत का सूत्रधार. था अफज़ल खान ने चाल के अनुसार शिवाजी के पास मैत्री का सन्देश भेजा शिवाजी ने भी कूटनीति का उत्तर कूटनीति से देते हुए उपहार आदि भेज दिए.अफज़ल खान अपनी सेना के साथ पहुँच गया शिवाजी से अथाह प्रेम करने वाले उनके देशभक्त साथी अन्य सेनापति आदि शिवाजी की सुरक्षा को लेकर बहुत ही चिंतित थे परन्तु शिवाजी, उनके ह्रदय में तो स्वराज्य को सुदृढ़ करने का निश्चय था.. शिवाजी ने अपना जिरह बख्तर धारण कर कुरता और अंगरखा धारण किया.सर पर बख्तर धारण का टोपी पहिन अपने एक हाथ में बघनखा धारण किया और चल दिए अफज़ल खान के साथ, उस धूर्त खान ने शिवाजी को गले मिलने का न्यौता दिया. लम्बा तडंगा भीमकाय युक्त अफज़ल खान और उसके कंधे तक पहुँचने वाले शिवाजी .अफज़ल खान उनकी गर्दन अपनी बगल में दबाकर शिवा के पेट में कटार ही मारने वाला था कि शिवाजी ने अपने बघनखे से उसको चीर डाला. अफज़ल खान यहाँ से भागा परन्तु सम्पूर्ण घटना की जानकारी मिलते ही शिवाजी के वीरों ने सुलतान की सेना को परास्त किया और जो सामान अफज़ल खान ने प्रतापगढ़ आते हुए लूटा था वो अपने कब्जे में कर लिया शिवाजी के एक वीर सरदार ने अफज़ल खान का प्राणांत कर दिया. सुलतान के कई सरदार शिवाजी से मिल गए.

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