नवग्रहों के रत्न – Gemstones of the Nine Planets

Share this:
hindi astrology

माणिक्य : यह रत्न ग्रहों के राजा सूर्य महाराज को बलवान बनाने के लिए पहना जाता है। इसका रंग हल्के गुलाबी से लेकर गहरे लाल रंग तक होता है। रत्न धारक के लिए शुभ होने की स्थिति में यह रत्न उसे व्यवसाय में लाभ, प्रसिद्धि, रोगों से लड़ने की शारीरिक क्षमता, मानसिक स्थिरता, राज-दरबार से लाभ तथा अन्य प्रकार के लाभ प्रदान कर सकता है। किन्तु रत्न धारक के लिए अशुभ होने की स्थिति में यह उसे अनेक प्रकार के नुकसान भी पहुंचा सकता है। माणिक्य को सामान्यतः दायें हाथ की कनिष्का उंगली में धारण करना चाहिए। इस रत्न को रविवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण करना चाहिए।

मोती : यह रत्न सब ग्रहों की माता चन्द्रमा को बलवान
बनाने के लिए पहना जाता है। मोती सीप से प्राप्त होता है। इसका रंग सफेद से लेकर हल्का पीला, हलका नीला, हल्का गुलाबी अथवा हल्का काला हो सकता है। ज्योतिष लाभ की दृष्टि से सफेद रंग अति उत्तम होता है तथा उसके पश्चात हल्का नीला तथा हल्का पीला रंग भी उत्तम है।रत्न धारक के लिए शुभ होने की स्थिति में यह उसे मानसिक शांति प्रदान करता है तथा विभिन्न प्रकार की सुख सुविधाएं भी प्रदान करता है। मोती को सामान्यतः दायें हाथ की अनामिका या कनिष्का उंगली में धारण करना चाहिए। इस रत्न को सोमवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण करना चाहिए।

पीला पुखराज : यह रत्न समस्त ग्रहों के गुरु बृहस्पति को बलवान करने के लिए पहना जाता है। इसका रंग हल्के पीले से लेकर गहरे पीले रंग तक होता है। रत्न धारक के लिए शुभ होने की स्थिति में यह उसे धन, विद्या, समृद्धि, अच्छा स्वास्थय तथा अन्य बहुत कुछ प्रदान कर सकता है। इस रत्न को सामान्यतः दायें हाथ की तर्जनी उंगली में गुरुवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण करना चाहिए।

हीरा ( सफेद पुखराज ) : यह रत्न शुक्र ग्रह को बलवान बनाने के लिए धारण किया जाता है तथा रत्न धारक के लिए शुभ होने पर यह उसे सांसरिक सुख-सुविधा, ऐशवर्य, मानसिक प्रसन्नता तथा अन्य बहुत कुछ प्रदान करता है। हीरे के अतिरिक्त शुक्र को बल प्रदान करने के लिए उप्रत्न सफेद पुखराज भी पहना जाता है। यह रत्न रंगहीन तथा साफ़ पानी या साफ़ कांच की तरह दिखता है। इन रत्नों को सामान्यतः दायें हाथ की मध्यामा उंगली में शुक्रवार की सुबह स्नान करने के बाद धारण करना चाहिए।

लाल मूंगा : यह रत्न मंगल को बलवान बनाने के लिए पहना जाता है तथा रत्न धारक के लिए शुभ होने पर यह उसे शारीरिक तथा मानसिक बल, अच्छे दोस्त, धन तथा अन्य बहुत कुछ प्रदान करता है। मूंगा गहरे लाल से लेकर हल्के लाल तथा सफेद रंग तक कई रगों में पाया जाता है, किन्तु मंगल ग्रह को बल प्रदान करने के लिए गहरा लाल अथवा हल्का लाल मूंगा ही धारण करना चाहिए। इस रत्न को सामान्यतः दायें हाथ की कनिष्का अथवा तर्जनी उंगली में मगलवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण करना चाहिए।

पन्ना : यह रत्न बुध ग्रह को बल प्रदान करने के लिए पहना जाता है तथा रत्न धारक के लिए शुभ होने पर यह उसे अच्छी वाणी, व्यापार, अच्छी सेहत, धन-धान्य तथा अन्य बहुत कुछ प्रदान करता है। पन्ना हल्के हरे रंग से लेकर गहरे हरे रंग तक में पाया जाता है। इस रत्न को सामान्यतः दायें हाथ की अनामिका उंगली में बुधवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण करना चाहिए।

नीलम : शनि महाराज का यह रत्न नवग्रहों के समस्त रत्नों में सबसे अनोखा है तथा रत्न धारक के लिए शुभ होने की स्थिती में यह उसे धन, सुख, समृद्धि, नौकर-चाकर, व्यापरिक सफलता तथा अन्य बहुत कुछ प्रदान कर सकता है किन्तु धारक के लिए शुभ न होने की स्थिती में यह धारक का बहुत नुकसान भी कर सकता है। इसलिए नीलम को किसी अच्छे ज्योतिषि के अनुकूल परामर्श के बगैर धारण नहीं करना चाहिए। इस रत्न का रंग हल्के नीले से लेकर गहरे नीले रंग तक होता है। इस रत्न को सामान्यतः दायें हाथ की मध्यमा उंगली में शनिवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण करना चाहिए।

गोमेद : यह रत्न राहु को बलवान करने के लिए पहना जाता है तथा रत्न धारक के लिए शुभ होने की स्थिति में यह उसे अनायास ही कही से धन अथवा अन्य लाभ प्रदान कर सकता है। किन्तु रत्न धारक के लिए अशुभ होने की स्थिति में यह रत्न उसका बहुत अधिक नुकसान कर सकता है और धारक को गंभीर बीमारियाँ जैसे की अल्सर, कैंसर तथा अन्य कई प्रकार की बीमारियाँ भी प्रदान कर सकता है। इसलिए इस रत्न को किसी अच्छे ज्योतिषि के अनुकूल परामर्श के बगैर धारण नहीं करना चाहिए। इसका रंग हल्के शहद के रंग से लेकर गहरे शहद के रंग तक होता है। इस रत्न को सामान्यतः दायें हाथ की मध्यमा अथवा अनामिका उंगली में शनिवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण करना चाहिए।

लहसुनिया : यह रत्न केतु बलवान करने के लिए पहना जाता है तथा रत्न धारक के लिए शुभ होने पर यह उसे व्यसायिक सफलता, आध्यात्मिक प्रगति तथा अन्य बहुत कुछ प्रदान कर सकता है किन्तु धारक के लिए अशुभ होने की स्थिति में यह उसे घोर विपत्तियों में डाल सकता है तथा उसे कई प्रकार के मानसिक रोगों से पीड़ित भी कर सकता है। इसलिए इस रत्न को किसी अच्छे ज्योतिषि के अनुकूल परामर्श के बगैर धारण नहीं करना चाहिए। इसका रंग लहसुन के रंग से लेकर गहरे भूरे रंग तक होता है किन्तु इस रत्न के अंदर दूधिया रंग की एक लकीर दिखाई देती है जो इस रत्न को हाथ में पकड़ कर धीरे-धीरे घुमाने के साथ-साथ ही घूमना शुरू कर देती है। इस रत्न को सामान्यतः दायें हाथ की मध्यमा उंगली में शनिवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण किया जाता है।

Share this:

Leave a Reply