विशेष राज्य का दर्जा

Share this:
विशेष राज्य का दर्जा क्यों दिया जाता है? 

देश की तीसरी पंचवर्षीय योजना यानी 1961-66 तक और फिर 1966-1969 तक केंद्र के पास राज्यों को अनुदान देने का कोई निश्चित फॉर्मूला नहीं था। उस समय तक सिर्फ योजना आधारित अनुदान ही दिए जाते थे। 1969 में केंद्रीय सहायता का फॉर्मूला बनाते समय पांचवें
वित्त आयोग ने गाडगिल फॉर्म्युले के अनुरूप तीन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया- असम, नागालैंड और जम्मू-कश्मीर। इसका आधार था इन राज्यों का पिछड़ापन, दुरूह भौगोलिक स्थिति और वहां व्याप्त सामाजिक समस्याएं। उसके बाद के वर्षों में पूर्वोत्तर के बाकी पांच राज्यों के साथ अन्य कई राज्यों को भी यह दर्जा दिया गया।

विशेष राज्य को 90 प्रतिशत केंद्रीय अनुदान प्राप्त होता है और बाकी 10 प्रतिशत ब्याजमुक्त कर्ज के रूप में। अन्य राज्यों को केंद्र से मात्र 70 प्रतिशत अनुदान मिलता है। विशेष राज्य को उत्पाद शुल्क में भी रियायत दी जाती है, ताकि उद्योगपति वहां अपनी औद्योगिक इकाइयां स्थापित करें। परंतु देखा यह गया कि आज तक इनमें से किसी भी राज्य का औद्योगीकरण नहीं हुआ।

राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा देने के पीछे मुख्य मुद्दा है उनका पिछड़ापन और क्षेत्रीय असंतुलन दूर करना, जो केंद्र की संवैधानिक जिम्मेदारी है। लेकिन सभी पिछड़े राज्यों को एक साथ विशेष राज्य का दर्जा मिलना असंभव है। इसलिए पिछड़ापन दूर करने के दूसरे उपायों पर भी विचार करना चाहिए।

Share this:

Leave a Reply