प्रेरक प्रसंग – 75 Rs की नौकरी – Inspirational Story – Job of Rs 75

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Picture Courtesy : www.shikshasankalp.org

यह घटना उस समय की है, जब स्वतंत्रता आंदोलन में तेजी आ रही थी।

सरकारी शिक्षा-संस्थाओं का बहिष्कार इसका एक हिस्सा था। ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों के लिए अच्छी शिक्षा-दीक्षा का उचित प्रबंध भी आवश्यक हो गया था। लेकिन बंगाल के आंदोलनकारियों के पास न तो इतना धन था और न ही सुविधाएं, जिससे कि विद्यालय चलाया जा सके। निर्णय हुआ कि आपसी सहयोग से ही ऐसा कॉलेज खोला जाए। किसी तरह चंदा जमा किया गया।
आम लोगों से जितना कुछ बन सका, सब ने सहयोग किया। फिर भी चंदे से जो राशि मिली वह काफी नहीं थी। आखिरकार जैसे-तैसे एक कॉलेज खोला गया। लेकिन इसके लिए संचालक की आवश्यकता थी। उसकी नियुक्ति के लिए विज्ञापन दे दिए गए। संचालक का वेतन कुल पचहत्तर रुपये मासिक तय किया गया। एक संचालक के लिए उस समय यह वेतन काफी कम था किंतु प्रबंध समिति संचालक को इससे अधिक वेतन देने की स्थिति में नहीं थी।

खुद प्रबंध समिति के सदस्यों ने इस बात को स्वीकार किया कि शायद इस वेतन पर कोई भी काम करना स्वीकार न करे। विज्ञापन के जवाब में बहुत दिनों तक कहीं से भी कोई आवेदन नहीं आया तो प्रबंध समिति निराश हो गई। 
मगर एक दिन अचानक ऐसे व्यक्ति का आवेदन पत्र आया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। बड़ौदा कॉलेज के अध्यक्ष अरविन्द घोष ने, जिन्हें उस समय अनेक सुविधाओं के साथ सात सात सौ रुपये मासिक वेतन मिलता था, मात्र पचहत्तर रुपये मासिक वेतन पर राष्ट्रीय महाविद्यालय का संचालक बनना स्वीकार कर लिया था।
यह खबर सुनकर तत्कालीन सभी शिक्षाशास्त्रियों ने स्वीकार किया – ‘जिस शैक्षणिक संस्था के संचालकों का चरित्र महान और जीवन त्यागपूर्ण होगा, निश्चय ही वहां के विद्यार्थी भी महान होंगे।’ और ऐसा ही हुआ। बाद में इस कॉलेज से अनेक चोटी के देशभक्त राजनेता निकले जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और दूसरों को भी प्रेरित किया।
आज शिक्षा के क्षेत्र मे इसी तरह की निस्वार्थ भावना की ज़रूरत है, सरकार को शिक्षा के बजारीकरण को सख्ती से रोकना चाहिए या साक्षर अभियान का नाटक बंद कर देना चाहिए ! सरकारी विधा मंदिरो की हालत किसी से छुपी नही है, कई क्षेत्रो मे सरकारी स्कूल बंद हो चुके है या बंद होने की कगार पर है ! जिसकी वजह प्राइवेट स्कूल खुलना है ! सरकारी स्कूल चलाने वाली सरकार के करता-धर्ता स्वयं अपने बच्चो को प्राइवेट स्कूल मे भेजते है ! शिक्षा का व्यापार ना बनाए , सभी स्कूल सरकार के अंतर्गत आए ताकि शिक्षा सभी वर्गो के लिए एक समान और मुफ़्त हो !
अपने बहुमूल्य विचार हमें नीचे Comment के माध्यम से देने का कष्ट करें! धन्यवाद !
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