स्वामी विवेकानंद के जीवन के प्रेरक प्रसंग-2 – Inspiration Story of Swami Vivekananda-2

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डर का सामना

एक बार बनारस में स्वामी विवेकनन्द जी माँ दुर्गा जी के मंदिर से निकल रहे थे कि तभी वहां मौजूद बहुत सारे बंदरों ने उन्हें घेर लिया और उनसे प्रसाद छिनने लगे  वे उनके नज़दीक आने लगे और डराने भी लगे. स्वामी जी बहुत भयभीत हो गए और खुद को बचाने के लिए दौड़ कर भागने लगे, पर बन्दर तो मानो पीछे ही पड़ गए और वे भी उन्हें पीछे पीछे दौडाने लगे.

पास खड़े एक वृद्ध सन्यासी ये सब देख रहे थे, उन्होनें स्वामी जी को रोका और
कहा – रुको ! डरो मत, उनका सामना करो और देखो क्या होता है!


वृद्ध सन्यासी की ये बात सुनकर स्वामी जी तुरन्त पलटे और बंदरों के तरफ बढ़ने लगे! उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब उनके ऐसा करते ही सभी बन्दर तुरंत भाग गए. उन्होनें वृद्ध सन्यासी को इस सलाह के लिए बहुत धन्यवाद किया!
इस घटना से स्वामी जी को एक गंभीर सीख मिली और कई सालों बाद उन्होंने एक संबोधन में इसका जिक्र भी किया और कहा – यदि तुम कभी किसी चीज से भयभीत हो, तो उससे भागो मत, पलटो और सामना करो.
वाकई, यदि हम भी अपने जीवन में आये समस्याओं का सामना करें और उससे भागें नहीं तो बहुत सी समस्याओं का समाधान हो जायेगा!
– अपने Comment के माध्यम से हमें अपने विचारों से अवगत कराएं!

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